साहस की नई परीक्षा: भारतीय सेना के ‘कोर ऑफ इंजीनियर्स’ का माउंट त्रिशूल अभियान शुरू, 7,120 मीटर ऊंची चोटी फतह करने निकले जांबाज

Roorkee, 07 September, 2026। गढ़वाल हिमालय की बर्फीली ढलानों और 7,120 मीटर की चुनौतीपूर्ण ऊंचाई पर स्थित माउंट त्रिशूल अब भारतीय सेना के कोर ऑफ इंजीनियर्स के जांबाज पर्वतारोहियों के हौसले की परीक्षा लेने के लिए तैयार है। रुड़की स्थित ‘बंगाल इंजीनियर ग्रुप एंड सेंटर’ से हरी झंडी मिलने के बाद, सेना के अनुभवी अधिकारियों और जवानों का यह साहसी दल बेस कैंप के लिए रवाना हो चुका है। अत्यधिक ठंड, कठिन भूभाग और पल-पल बदलते मौसम के बीच यह अभियान केवल ऊंचाई को छूने की कवायद नहीं, बल्कि भारतीय सेना के अदम्य साहस, अनुशासन, मानसिक दृढ़ता और उत्कृष्ट पर्वतारोहण परंपरा का जीवंत प्रतीक है। अभियान के रवाना होने के अवसर पर सेंट्रल कमांड के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता, इंजीनियर-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल विकास रोहेला और बंगाल सैपर्स एंड मिलिट्री सर्वे के कर्नल कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल एसएस दहिया समेत सेना के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
कोर ऑफ इंजीनियर्स के पर्वतारोहण में उपलब्धियां हासिल कर चुके अनुभवी अधिकारियों ने भी अभियान दल से संवाद कर उनका उत्साह बढ़ाया। रवानगी से पहले अभियान टीम लीडर ने ऑपरेशनल ब्रीफिंग में प्रस्तावित यात्रा कार्यक्रम, चढ़ाई मार्ग, सुरक्षा प्रोटोकॉल और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की जानकारी दी। लेफ्टिनेंट जनरल सेनगुप्ता ने दल की फिटनेस, मानसिक दृढ़ता और टीम भावना की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे अभियान नेतृत्व, अनुशासन, सहनशक्ति, टीमवर्क और परिस्थितियों के अनुरूप सोच-समझकर जोखिम लेने की क्षमता विकसित करते हैं। माउंट त्रिशूल अभियान सिर्फ ऊंचाई पर पहुंचने की चुनौती नहीं, बल्कि अत्यधिक ठंड, कठिन भूभाग और तेजी से बदलते मौसम के बीच टीम की शारीरिक और मानसिक क्षमता की परीक्षा भी है। अभियान दल ने ऊंचाई वाले वातावरण के अनुकूलन, कठोर शारीरिक प्रशिक्षण और पर्वतारोहण की तकनीकों का विशेष अभ्यास किया है। चढ़ाई के दौरान तकनीकी और लॉजिस्टिक चुनौतियों से निपटने के लिए भी व्यापक तैयारियां की गई हैं। समारोह का समापन अभियान टीम लीडर को औपचारिक ‘एक्सपेडिशन फ्लैग’ सौंपने के साथ हुआ। इसके बाद दल बेस कैंप की ओर रवाना हुआ। माउंट त्रिशूल अभियान सेना के कोर ऑफ इंजीनियर्स की साहस और पर्वतारोहण की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ कठिन परिस्थितियों में सैन्य कौशल और जज्बे का प्रदर्शन भी करेगा।


