उत्तराखंडस्वास्थ्य

उत्तराखंड में शहरी महिलाओं पर भारी पड़ रही आधुनिक जीवनशैली, 42.8% महिलाएं मोटापे का शिकार

Dehradun, 04 October, 2026। उत्तराखंड के शहरी क्षेत्रों में महिलाओं के बीच बढ़ता मोटापा अब एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। घर और दफ्तर की दोहरी जिम्मेदारी, घंटों बैठकर काम करने की आदत, शारीरिक गतिविधियों में कमी और खानपान में आए बदलावों के कारण शहरी महिलाओं में वजन बढ़ने की समस्या तेजी से फैल रही है।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (2019-21) के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में 39.1 प्रतिशत शहरी महिलाएं अधिक वजन या मोटापे की श्रेणी में थीं। NFHS-6 की नवीनतम रिपोर्ट में यह आंकड़ा बढ़कर 42.8 प्रतिशत पर पहुंच गया है। इस प्रकार पिछले चार वर्षों में इसमें 3.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो दर्शाता है कि हर दस में से चार से अधिक शहरी महिलाएं मोटापे से प्रभावित हैं।

स्वास्थ्य विभाग की महानिदेशक डॉ. सुनीता टम्टा के अनुसार, मोटापा बढ़ने से शरीर में रक्तचाप और रक्त शर्करा का स्तर बढ़ता है। यह स्थिति हृदय पर अत्यधिक दबाव डालती है, जिससे कोरोनरी आर्टरी डिजीज जैसी गंभीर दिल की बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। इस स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय पर स्क्रीनिंग और जांच अभियान चलाए जा रहे हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि मोटापे को केवल एक शारीरिक बदलाव मानकर अनदेखा न करें। 30 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को नियमित रूप से ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच करानी चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतिदिन पैदल चलना, संतुलित आहार लेना, पर्याप्त नींद और वजन नियंत्रित रखना हृदय को स्वस्थ रखने के लिए बेहद जरूरी है। सही समय पर सजगता और जीवनशैली में बदलाव लाकर इस खतरे को कम किया जा सकता है।

  • मशीनों पर निर्भरता भी है सबसे बड़ा कारण: शहरों में महिलाओं की दिनचर्या में आए बदलाव भी इस स्थिति को प्रभावित कर रहे हैं। दफ्तरों में लंबे समय तक बैठकर काम करना, घरेलू कामों के लिए मशीनों पर निर्भरता, वाहन से छोटी दूरी तय करना और नियमित व्यायाम के लिए समय नहीं निकाल पाना शारीरिक सक्रियता को कम कर रहा है। इसके साथ ही बाहर का भोजन, पैकेटबंद खाद्य पदार्थ और अधिक कैलोरी वाले स्नैक्स का बढ़ता चलन वजन बढ़ने की समस्या को और गंभीर बना रहा है।
  • 30 से 40 वर्ष की महिलाओं में हृदय रोग का खतरा बढ़ा : चिंता की बात यह है कि हृदय संबंधी बीमारियां अब अधिक उम्र की महिलाओं तक सीमित नहीं रह गई हैं। दून मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों के अनुसार 30 से 40 वर्ष की महिलाएं भी हृदय की धमनियों में रुकावट की समस्या लेकर पहुंच रही हैं। चिकित्सकों ने 40 वर्षीय महिला की एंजियोप्लास्टी का उदाहरण भी दिया है। यह स्थिति कम उम्र में हृदय रोगों के जोखिम को लेकर सतर्क करती है। प्रदेश में 14 प्रतिशत महिलाओं का ब्लड प्रेशर असामान्य है, जबकि 18 प्रतिशत महिलाओं में रक्त शर्करा अनियंत्रित है। मोटापे के साथ ये दोनों स्थितियां हृदय पर दबाव बढ़ाती हैं। रक्तचाप और शुगर नियंत्रित रखने के लिए कई महिलाएं दवाओं का सेवन कर रही हैं।

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