
Dehradun, 07 October, 2026। उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में सियासी घमासान तेज होता नजर आ रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने एक बार फिर पार्टी के भीतर चल रही राजनीति पर सवाल उठाते हुए 2016 की बगावत का मुद्दा छेड़ दिया है। जसपुर से हल्द्वानी तक धन्यवाद यात्रा पर निकले रावत ने बिना नाम लिए हाईकमान पर निशाना साधा और पूछा कि आखिर सरकार गिराने वालों को सम्मान और सरकार बचाने वालों को नजरअंदाज क्यों किया जा रहा है? सोशल मीडिया पर साझा की गई अपनी पोस्ट में हरीश रावत ने कहा कि वर्ष 2016 में कांग्रेस की टूट में “इंस्ट्रूमेंट” बने व्यक्ति को आज पार्टी में महिमामंडित किया जा रहा है और वह हीरो बन गए हैं। वहीं, जिन नेताओं ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार को बचाने के लिए अपना पूरा राजनीतिक जीवन दांव पर लगा दिया, उन्हें ही विलेन की तरह देखा जा रहा है।
रावत ने कहा कि जिस व्यक्ति के कारण उनकी सरकार को गिराने का प्रयास किया गया, आज उसी को धन-संपत्ति और प्रभाव के आधार पर सम्मान दिया जा रहा है। इसके विपरीत, सरकार बचाने के लिए संघर्ष करने वाले नेताओं के योगदान को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कांग्रेस की मौजूदा राजनीति में विचारधारा और राजनीतिक स्मृति में आए बदलाव पर भी सवाल खड़े किए। गौरतलब है कि वर्ष 2016 में उत्तराखंड में कांग्रेस के नौ विधायक बागी हो गए थे। इन विधायकों ने भाजपा के समर्थन से तत्कालीन हरीश रावत सरकार के सामने राजनीतिक संकट खड़ा कर दिया था। इसके बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया गया। बाद में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में विधानसभा में फ्लोर टेस्ट कराया गया, जिसमें हरीश रावत सरकार ने बहुमत साबित कर सत्ता बरकरार रखी थी। हरीश रावत का यह बयान ऐसे समय आया है जब वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड कांग्रेस में नेतृत्व, संगठन और चुनावी रणनीति को लेकर मतभेद लगातार सामने आ रहे हैं। उनके ताजा बयान को पार्टी के भीतर चल रही राजनीतिक खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है।



