उत्तराखंड

ज्योतिर्मठ हेलीकॉप्टर हादसा: रातभर चले कठिन रेस्क्यू के बाद 6 शव बरामद, 12 किमी पैदल चलकर सड़क तक पहुंचे जवान; पहचान के लिए AIIMS ऋषिकेश में होगा DNA टेस्ट

Jyotirmath, 02 November, 2026। ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) के समीप हुए भीषण हेलीकॉप्टर हादसे के बाद दुर्गम हिमालयी पहाड़ियों में चलाए गए एक बेहद चुनौतीपूर्ण और रातभर चले अभियान के दौरान सभी छह मृतकों के पार्थिव शरीर बरामद कर लिए गए हैं। भारतीय सेना, ITBP, SDRF, NDRF और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त टीमों को हवाई मदद न मिल पाने और सड़क मार्ग न होने के कारण शवों को कंधों पर उठाकर करीब 12 किलोमीटर कठिन पैदल रास्तों से गुज़रना पड़ा। क्षत-विक्षत अवस्था में मिले इन शवों को पोस्टमार्टम और परिजनों से मिलान हेतु DNA परीक्षण के लिए एम्स (AIIMS) ऋषिकेश भेज दिया गया है। जिलाधिकारी गौरव कुमार अनुसार दुर्घटना का स्थल अत्यधिक दुर्गम और ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्र में स्थित था।

यहां तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग की सुविधा नहीं थी। इसके चलते संयुक्त रेस्क्यू टीमों ने पांडुकेश्वर की तरफ से कठिन पहाड़ी रास्तों पर पैदल चढ़ाई शुरू की। दुर्गम रास्तों और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण टीमों को घटनास्थल तक पहुंचने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। देर शाम बचाव दल दुर्घटनास्थल तक पहुंचे और इसके बाद शवों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभियान शुरू किया गया। पूरी रात चले इस अभियान के बाद रविवार सुबह करीब पौने पांच बजे अंतिम शव जोशीमठ पहुंचाया गया। इसके साथ ही हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मारे गए सभी छह लोगों के पार्थिव शरीर बरामद करने का अभियान पूरा हुआ। इसके बाद सभी शवों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), ज्योतिर्मठ लाया गया, जहां जरूरी औपचारिकताएं पूरी की गईं। इसके बाद एनटीपीसी हेलीपैड से हेलीकॉप्टर के माध्यम से सभी छह पार्थिव शरीरों को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), ऋषिकेश भेजा गया। एम्स में मृतकों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए डीएनए परीक्षण की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसके बाद पोस्टमार्टम कराया जाएगा और पार्थिव शरीर उनके परिजनों को सौंपे जाएंगे। हादसे में छह लोगों की मौत से क्षेत्र में शोक का माहौल है।

वहीं, पूरी रात चले इस रेस्क्यू अभियान ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में आपातकालीन बचाव कार्यों की कठिन चुनौतियों को उजागर किया है। दुर्गम पहाड़ों में 12 किलोमीटर तक पैदल शवों को उठाकर सड़क तक पहुंचाने वाले जवानों का प्रयास इस अभियान का सबसे चुनौतीपूर्ण पक्ष रहा। सेना से लेकर स्थानीय प्रशासन और आपदा राहत एजेंसियों तक सभी ने मिलकर अभियान को अंजाम तक पहुंचाया। अंधेरा, दुर्गम रास्ते और पहाड़ों की कठिन परिस्थितियां बचाव अभियान में बड़ी बाधा बनी रहीं। इसके बावजूद सेना और अन्य एजेंसियों के जवानों ने पूरी रात अभियान जारी रखा। एक-एक कर सभी छह शवों को दुर्घटनास्थल से बाहर निकाला गया। इसके बाद उन्हें करीब 12 किलोमीटर पैदल उठाकर निकटतम सड़क तक पहुंचाया गया। लंबी दूरी और दुर्गम रास्तों के चलते यह काम बेहद कठिन रहा। बचाव दलों ने आपसी समन्वय के साथ शवों को सुरक्षित सड़क तक पहुंचाने का जिम्मा संभाला। ऋषिकेश एम्स पहुंचे शवों की हालत बेहद खराब है। क्षत विक्षत होने के कारण शवों की शिनवाख्त चुनौती बनी हुई है। ऐसे में शवों के डीएनए सैंपल की जांच कर उनका मिलना परिजनों के डीएनए से कराया जाएगा। अस्पताल में डीएनए सैंपल एकत्रित कर लिए गए हैं।

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