हर घर में सिर्फ नल नहीं, पानी भी पहुंचे, जल जीवन मिशन की समीक्षा में सीएम धामी के सख्त निर्देश

Dehradun, 13 August, 2026। पेयजल योजनाओं में प्रशासनिक ढिलाई और तकनीकी अड़चनों को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जिलाधिकारियों को सीधे कमान संभालने के निर्देश दिए हैं। बुधवार को सचिवालय में जल जीवन मिशन की प्रगति की समीक्षा करते हुए सीएम ने कहा कि केवल कागजों में लक्ष्य पूरा करना मकसद नहीं है, बल्कि धरातल पर हर नल से साफ पानी पहुंचना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि शेष गांवों में सत्यापन की प्रक्रिया तेजी से पूरी की जाए और स्थायी संचालन व्यवस्था बनाई जाए ताकि भविष्य में पेयजल संकट न खड़ा हो। बैठक में जलापूर्ति योजनाओं की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति, ग्रामीण परिवारों को नल से जल की उपलब्धता, जल गुणवत्ता, योजनाओं के सत्यापन और संचालन-रखरखाव की स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन और लंबित पेयजल योजनाओं को मिशन मोड में पूरा करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारियों को संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर योजनाओं से जुड़ी तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों का तत्काल समाधान करने को कहा गया।मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन परिवारों को कनेक्शन मिल चुके हैं, वहां पानी की उपलब्धता और गुणवत्ता भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। बैठक में बताया गया कि राज्य के 14,979 गांवों में से अब तक 9,796 गांवों में हर नल से जल पहुंचने का सत्यापन पूरा किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने शेष गांवों में भी सत्यापन प्रक्रिया तेजी से पूरी करने को कहा। उन्होंने योजनाओं के संचालन और रखरखाव के लिए स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा प्रत्येक जिले में लक्ष्य, समयसीमा और जवाबदेही तय करने को कहा।
अनावश्यक विलंब पाए जाने पर संबंधित कार्यदायी संस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। सरकार का लक्ष्य अब हर घर में नल पहुंचाने के साथ उस नल से हर दिन पानी पहुंचाना है। बैठक में अवस्थापना अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष श्री विश्वास डाबर, प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, सचिव पेयजल रणवीर सिंह चैहान, अपर सचिव रोहित मीणा, सुश्री झरना कमठान एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। समीक्षा में बताया गया कि राज्य में जल जीवन मिशन के तहत कुल 16,555 योजनाओं में से 15,540 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं। राज्य की औसत प्रगति 92.46 प्रतिशत है, जबकि 1,015 योजनाएं अभी निर्माणाधीन हैं। ग्रामीण परिवारों तक नल से जल की पहुंच की समीक्षा में सामने आया कि कुल 14.48 लाख परिवारों में से 14.20 लाख परिवारों को नल कनेक्शन उपलब्ध कराया जा चुका है।
मुख्यमंत्री ने पर्वतीय क्षेत्रों में पेयजल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवीकरण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने वर्षा जल संचयन और जल स्रोतों के पुनर्भरण पर भी विशेष ध्यान देने को कहा, ताकि भविष्य में पेयजल संकट की स्थिति न बने। प्रत्येक जिले में जलापूर्ति से जुड़ी तकनीकी समस्याओं के त्वरित समाधान की व्यवस्था विकसित करने के निर्देश भी दिए गए।



