उत्तराखंड

पहाड़ की नई पहचान, ‘लखपति दीदी’ योजना से बदलती ग्रामीण अर्थव्यवस्था

Dehradun, 14 August, 2026। उत्तराखंड में महिला सशक्तीकरण अब कागज़ी दावों या सरकारी योजनाओं के भाषणों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के रूप में प्रत्यक्ष दिख रहा है। वर्ष 2022 में शुरू हुई ‘लखपति दीदी’ योजना ने देवभूमि की महिलाओं को पारंपरिक चूल-चौके की सीमाओं से बाहर निकालकर आत्मनिर्भर उद्यमी बना दिया है। आज प्रदेश में 3 लाख से अधिक महिलाएं अपनी वार्षिक आय 1 लाख रुपये से अधिक कर आर्थिक स्वावलंबन की नई मिसाल पेश कर रही हैं।

अब वित्तीय वर्ष 2026-27 में 1.12 लाख और महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। संबंधित विभाग लक्ष्य को निर्धारित अवधि से पहले हासिल करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत नवंबर 2022 में शुरू की गई लखपति दीदी योजना ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने का मजबूत जरिया बनी है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को प्रशिक्षण, ऋण, अनुदान और बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसका असर यह है कि महिलाएं पारंपरिक घरेलू कामकाज से आगे बढ़कर अपने कारोबार खड़े कर रही हैं।

लखपति दीदियों ने जैविक खेती, खाद्य प्रसंस्करण, मसाला निर्माण, हस्तशिल्प, डेयरी-पशुपालन, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन और होमस्टे जैसे व्यवसायों को अपनाया है। पहाड़ी क्षेत्रों में स्थानीय उत्पादों और मिलेट की बढ़ती मांग ने भी महिलाओं के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। मिलेट से बेकरी उत्पाद तैयार कर कई समूह बाजार में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं।

महिलाओं को उत्पादन के साथ बाजार उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश में 24 ग्रोथ सेंटर, 33 नैनो पैकेजिंग यूनिट और 17 सरस सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सरस मेलों के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों को ग्राहकों और बड़े बाजारों से जोड़ा जा रहा है।

स्थानीय उत्पादों को ब्रांड पहचान देने में ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ अहम कड़ी बना है। पैकेजिंग, ब्रांडिंग और गुणवत्ता सुधार के बाद पहाड़ की महिलाओं के उत्पाद अब महानगरों और देश के प्रमुख बाजारों तक पहुंच रहे हैं। इससे उत्पादों की बिक्री के साथ महिलाओं की आमदनी बढ़ाने का रास्ता भी मजबूत हुआ है।

प्रदेश के सभी 13 जिलों के 95 ब्लॉकों में 5,19,943 महिलाएं आजीविका मिशन से जुड़ी हैं। इनके लिए 70,767 स्वयं सहायता समूह, 8,179 ग्राम संगठन और 615 क्लस्टर लेवल फेडरेशन गठित किए गए हैं। महिला स्वावलंबन के लिए सरकार ने सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण और सहकारी समितियों में 33 प्रतिशत आरक्षण जैसे फैसले किए हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार, सशक्त बहना, ड्रोन दीदी, सोलर सखी, सतत आजीविका मिशन, नारी सशक्तिकरण और उद्यमशाला जैसी योजनाएं महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ रही हैं। इस तरह लखपति दीदी अभियान पहाड़ की महिलाओं के लिए सिर्फ आय बढ़ाने की योजना नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर गांव और मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नींव बनता जा रहा है।

मातृशक्ति उत्तराखण्ड की आर्थिक और सामाजिक क्रांति की सबसे बड़ी संवाहक है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि राज्य के विकास में भी अग्रणीय भूमिका निभा रही हैं।
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड

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