उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों का होगा कायाकल्प: डायलिसिस, किडनी ट्रांसप्लांट और ई-हॉस्पिटल सेवा होगी शुरू

Dehradun, 19 August, 2026। उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को आधुनिक रूप देने के लिए राज्य सरकार ने बड़े फैसलों पर काम शुरू कर दिया है। इसके तहत जिला अस्पतालों को 31 मार्च 2027 तक NABH मानकों के अनुरूप तैयार करने, सरकारी अस्पतालों में 24 घंटे डायलिसिस सेवा देने और अगले तीन महीनों के भीतर किडनी ट्रांसप्लांट सुविधा शुरू करने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके साथ ही डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए सेवानिवृत्त व निजी विशेषज्ञों की सेवाएं लेने पर भी जोर दिया जा रहा है। अस्पतालों में अब इलाज से लेकर मरीजों के रिकॉर्ड और अस्पताल प्रबंधन तक की व्यवस्था को डिजिटल प्लेटफार्म से जोड़ा जाएगा। प्रदेश के अस्पतालों को ई-हॉस्पिटल की दिशा में आगे बढ़ाते हुए एकीकृत स्वास्थ्य प्रबंधन प्रणाली लागू करने की तैयारी है। इससे अस्पतालों की सेवाओं की निगरानी, मरीजों के रिकॉर्ड का प्रबंधन और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का संचालन अधिक व्यवस्थित और प्रभावी हो सकेगा।
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने मंगलवार को सचिवालय में चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को इस दिशा में तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि अस्पतालों का डिजिटलीकरण केवल कंप्यूटर और तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसका सीधा लाभ मरीजों को मिलना चाहिए। उन्होंने एकीकृत स्वास्थ्य प्रबंधन प्रणाली के प्रभावी संचालन के लिए चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मचारियों को आवश्यक प्रशिक्षण देने के साथ तकनीकी सहयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही सिस्टम के सुचारु संचालन के लिए वार्षिक रखरखाव अनुबंध की व्यवस्था करने को कहा। सरकारी अस्पतालों में उपचार की गुणवत्ता और मरीजों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए सभी जिला अस्पतालों और बड़े उप जिला अस्पतालों को 31 मार्च 2027 तक एनएबीएच प्रत्यायन दिलाने का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को इसकी प्रक्रिया तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए, ताकि अस्पताल निर्धारित गुणवत्ता मानकों को समय रहते पूरा कर सकें। सरकारी अस्पतालों में संचालित डायलिसिस केंद्रों को अब 24 घंटे संचालित करने पर जोर दिया गया है। इससे गंभीर मरीजों और नियमित डायलिसिस की आवश्यकता वाले लोगों को अधिक सुविधा मिल सकेगी। बैठक में प्रदेश में किडनी ट्रांसप्लांट सुविधा शुरू करने की तैयारियों की भी जानकारी दी गई। मुख्य सचिव ने इसे अगले तीन माह के भीतर शुरू करने के निर्देश दिए। अधिकारियों के अनुसार इसके लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा तैयार है और विशेषज्ञ की व्यवस्था भी कर ली गई है। अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी दूर करने के लिए रिक्त पदों को जल्द भरने के निर्देश दिए गए। सेवानिवृत्ति के बाद भी सेवाएं देने के इच्छुक चिकित्सकों को उनकी इच्छा के अनुसार अवसर देने की व्यवस्था पर भी जोर दिया गया। इसके लिए सेवानिवृत्ति से पहले ही आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने को कहा गया।
इसके अलावा निजी अस्पतालों के विशेषज्ञ चिकित्सकों को विजिटिंग डॉक्टर के रूप में सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों से जोड़ने की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए गए। मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी मजबूत करने, सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं का विस्तार करने और इवनिंग ओपीडी शुरू करने पर भी जोर दिया गया। बैठक में सचिव विनय शंकर पाण्डेय, सीईओ स्टेट हेल्थ अथॉरिटी रीना जोशी, अपर सचिव रोहित मीणा, सौरभ गहरवार और महानिदेशक स्वास्थ्य सुनीता टम्टा समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।



