कॉर्बेट पार्क में ‘जादुई साइटिंग’: 3 घंटे तक बाघ की अठखेलियां देखते रहे पर्यटक, बना अनोखा रिकॉर्ड

रामनगर। क्या आपने कभी सुना है कि जंगल सफारी पर गए सभी लोग एक साथ किस्मत वाले साबित हों? जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के गर्जिया जोन में ऐसा ही एक हैरान कर देने वाला नजारा देखने को मिला। यहाँ भीषण गर्मी के बीच पानी की तलाश में आए एक बाघ ने सभी 30 जिप्सियों के सामने पूरे तीन घंटे तक डेरा जमाए रखा। कॉर्बेट के इतिहास की इस सबसे दुर्लभ और पहली घटना ने पर्यटकों को रोमांचित कर दिया है, जहाँ कोई भी सैलानी खाली हाथ वापस नहीं लौटा। पार्क वार्डन बिंदर पाल सिंह ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि की पुष्टि करते हुए बताया कि भीषण गर्मी के चलते इन दिनों वन्यजीवों के व्यवहार में बदलाव आया है। उन्होंने विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि गर्मियों के मौसम में वन्यजीवों को पानी की अधिक आवश्यकता होती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए पार्क विभाग की तरफ से सभी प्राकृतिक और मानव निर्मित वॉटर होल्स की 24 घंटे लगातार निगरानी की जा रही है।
जिन जल स्रोतों में पानी कम हो रहा है, वहां टैंकरों के जरिए नियमित रूप से पानी भरा जा रहा है। भीषण गर्मी की वजह से ही इन दिनों बाघ और अन्य वन्यजीव पानी पीने के लिए वॉटर होल्स के आसपास ज्यादा समय बिता रहे हैं। गर्जिया जोन में पहली बार ऐसा जादुई नजारा देखने को मिला, जब सैलानी पूरे तीन घंटे तक बाघ की अठखेलियां देखते रहे और किसी भी जिप्सी के पर्यटक खाली हाथ नहीं लौटे। गर्जिया जोन पिछले कुछ वर्षों में बाघों के दीदार के लिए सैलानियों का सबसे पसंदीदा स्पॉट बनकर उभरा है। बिजरानी क्षेत्र के बिल्कुल नजदीक स्थित होने के कारण इस जोन को प्राकृतिक रूप से फायदा मिलता है।
यहां के घने जंगल, ऊंचे घास के मैदान, प्राकृतिक जल स्रोत और चारों तरफ फैली जैव विविधता बाघों को एक बेहतरीन और सुरक्षित रिहाइश मुहैया कराती है। यही वजह है कि यहां बाघों का कुनबा लगातार बढ़ रहा है और वे बिना किसी डर के पर्यटकों के सामने आ रहे हैं। पर्यटन और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए पार्क प्रशासन ने कड़े नियम लागू किए हैं।
गर्जिया जोन में सुबह और शाम की सफारी के दौरान केवल 30-30 जिप्सियों को ही प्रवेश की अनुमति दी जाती है। इससे जंगल पर इंसानी दबाव कम रहता है और बाघ बिना विचलित हुए घूम पाते हैं। इस अनूठी घटना के बाद पार्क प्रबंधन ने पर्यटकों से विशेष अपील की है कि वे सफारी के दौरान पूरी तरह शांति बनाए रखें, मोबाइल को साइलेंट पर रखें और वन्यजीवों की प्राकृतिक गतिविधियों में किसी भी तरह का दखल न दें।



