उत्तराखंड

नवजात शिशुओं के लिए देश में पहली बार चलेंगी विशेष रोड एम्बुलेंस

देहरादून। देश में गंभीर रूप से बीमार और समय से पहले जन्मे (प्रीमैच्योर) नवजात शिशुओं को अब सुरक्षित तरीके से बड़े अस्पतालों में शिफ्ट किया जा सकेगा। केंद्र सरकार ने पहली बार शिशुओं के इलाज के लिए अत्याधुनिक जीवनरक्षक उपकरणों से लैस विशेष ‘नियोनेटल रोड एम्बुलेंस’ का प्रस्ताव रखा है। इसके लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने एम्बुलेंस मानकों (AIS-125) में संशोधन का मसौदा जारी कर जनता से सुझाव मांगे हैं। इस नई पहल का उद्देश्य सफर के दौरान भी नवजातों को बेहतर इलाज देना और हादसों में घायलों की जान बचाने के लिए एम्बुलेंस में रेस्क्यू टूल अनिवार्य करना है। सड़क एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार कि सड़क एंबुलेंस आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। कई बार दुर्घटना या गंभीर बीमारी के बाद अस्पताल पहुंचने से पहले ही मरीज की जान चली जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार यदि घायल या गंभीर मरीज को पहले एक घंटे के भीतर उपचार मिल जाए तो सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली करीब 50 प्रतिशत मौतों को रोका जा सकता है। इसी वजह से सरकार एंबुलेंस को अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनाने की दिशा में काम कर रही है। सरकार ने बी, सी और डी श्रेणी की सभी रोड एंबुलेंस में बचाव उपकरण अनिवार्य करने का भी प्रस्ताव रखा है। इनकी मदद से दुर्घटनाग्रस्त वाहनों में फंसे लोगों को तेजी से बाहर निकाला जा सकेगा। वहीं, इलेक्ट्रिक एम्बुलेंस में चिकित्सा उपकरणों को लगातार बिजली उपलब्ध कराने के लिए अलग पावर सोर्स देने की व्यवस्था भी की जाएगी। ये नए मानक सिर्फ राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए नहीं, बल्कि देशभर में सड़क पर चलने वाली सभी नई रोड एंबुलेंस पर लागू होंगे।

मंत्रालय ने मसौदा अधिसूचना सार्वजनिक सुझावों के लिए जारी कर दी है। सुझावों पर विचार के बाद अंतिम नियम लागू किए जाएंगे। इससे उम्मीद है कि विशेष रूप से नवजात शिशुओं और गंभीर मरीजों को रास्ते में ही बेहतर चिकित्सा सहायता मिल सकेगी और उनकी जान बचाने की संभावना बढ़ेगी। नवजात एंबुलेंस के अलावा मसौदे में मल्टी-स्ट्रेचर रोड एंबुलेंस का भी प्रावधान किया गया है। इनमें एक साथ कई मरीजों को ले जाया जा सकेगा। ऐसी एम्बुलेंस बड़े सड़क हादसों, प्राकृतिक आपदाओं और सामूहिक दुर्घटनाओं के दौरान राहत कार्य में उपयोगी साबित होंगी। उत्तराखंड के दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों में कई बार गंभीर या समय से पहले जन्मे नवजातों को उच्च स्तरीय अस्पताल तक पहुंचाने में घंटों लग जाते हैं। बारिश, भूस्खलन और लंबी दूरी के कारण जोखिम भी बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में विशेष नवजात एंबुलेंस जीवनरक्षक साबित हो सकती हैं। इनमें इन्क्यूबेटर, ऑक्सीजन और अन्य जरूरी उपकरण होने से सफर के दौरान भी इलाज जारी रहेगा।

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