सभी आपातकालीन नंबरों का 112 में होगा विलय

- मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देर्शों को जल्द लागू करने के दिए निर्देश
- शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने पर दिया जोर
देहरादून। उत्तराखंड में अब किसी भी आपात स्थिति में अलग-अलग हेल्पलाइन नंबर याद रखने के झंझट से मुक्ति मिलने जा रही है। राज्य सरकार पुलिस, फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस जैसी सभी प्रमुख आपातकालीन सेवाओं को एकीकृत कर एक ही नंबर—112 के तहत लाने की तैयारी पूरी कर चुकी है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद इस व्यवस्था को तय समयसीमा में लागू करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के तहत लिए गए इस फैसले से न केवल दुर्घटना पीड़ितों को त्वरित चिकित्सा व पुलिस सहायता मिलेगी, बल्कि ऑटोमैटिक रिस्पांस सिस्टम और एम्बुलेंस की रियल-टाइम जीपीएस ट्रैकिंग से रेस्पॉन्स टाइम में भी भारी कमी आएगी।
गुरुवार को मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को त्वरित और प्रभावी चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन को लेकर बैठक ली। इसमें मुख्य सचिव ने कहा कि सभी विभाग तकनीकी और परिचालन स्तर पर अपनी हेल्पलाइन सेवाओं को 112 से जोड़ने की प्रक्रिया तेजी से पूरी करें। उन्होंने कहा कि एकीकरण के बाद किसी भी व्यक्ति को आपात स्थिति में केवल 112 पर कॉल करना होगा और जरूरत के अनुसार पुलिस, फायर या मेडिकल सहायता स्वतः संबंधित विभाग तक पहुंच जाएगी। बैठक में गुड सेमेरिटन शिकायत निवारण तंत्र को भी मजबूत करने पर जोर दिया गया। इसके लिए राज्य स्तर पर महानिदेशक स्वास्थ्य को नोडल अधिकारी तथा जिला स्तर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
सभी जिलों में नियमित मासिक बैठकें आयोजित कर उनकी रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड की जाएगी। बैठक में राज्य स्तरीय ट्रॉमा रजिस्ट्री स्थापित करने का भी निर्णय लिया गया। परिवहन विभाग को इसका नोडल विभाग बनाया गया है। यह रजिस्ट्री राज्य के सभी अस्पतालों से जुड़ी होगी और बाद में इसे राष्ट्रीय ट्रॉमा रजिस्ट्री से भी एकीकृत किया जाएगा। साथ ही सड़क दुर्घटना पीड़ितों को त्वरित उपचार उपलब्ध कराने के लिए पीएम-राहत योजना का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। नई व्यवस्था लागू होने के बाद उत्तराखंड में आपातकालीन सेवाओं की प्रतिक्रिया प्रणाली और अधिक तेज, समन्वित और प्रभावी होने की उम्मीद है।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को बिना मानवीय हस्तक्षेप वाली ऑटोमैटिक रिस्पांस प्रणाली विकसित करने के निर्देश दिए। इस प्रणाली के जरिए कॉल मिलते ही संबंधित सेवा को स्वतः सूचना भेजी जाएगी, जिससे प्रतिक्रिया का समय कम होगा और लोगों को तत्काल मदद मिल सकेगी।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सभी सरकारी और निजी एंबुलेंसों में एआईएस-125 मानकों के अनुरूप उपकरण, जीपीएस और व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (वीएलटीडी) अनिवार्य रूप से लगाए जाएं। इन सभी एम्बुलेंसों को भी हेल्पलाइन 112 से रियल टाइम जोड़ा जाएगा, जिससे जरूरत पड़ने पर सबसे नजदीकी एम्बुलेंस तुरंत मौके पर भेजी जा सके।



