आईआईटी रुड़की: नवीकरणीय अल्कोहलों से सस्ती दवाओं के निर्माण का रास्ता साफ

रुड़की। नवीकरणीय और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों की दिशा में आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों ने एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। रसायन विज्ञान विभाग के प्रो. देबाशीष बनर्जी के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने पृथ्वी पर प्रचुर मात्रा में उपलब्ध निकेल (Nickel) उत्प्रेरक का उपयोग कर नवीकरणीय अल्कोहलों को उच्च-मूल्य वाले जटिल कार्बनिक रसायनों में बदलने की तकनीक विकसित की है। यह शोध प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पत्रिका नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित हुआ है। यह तकनीक औषधि उद्योग और सामग्री विज्ञान को अधिक स्वच्छ, किफायती और टिकाऊ (Sustainable) बनाने में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। यह शोध प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन में बताया गया है कि पृथ्वी पर प्रचुर मात्रा में उपलब्ध निकेल उत्प्रेरक और नवीकरणीय कच्चे पदार्थों की सहायता से अत्यधिक चयनात्मक रासायनिक संश्लेषण संभव बनाया जा सकता है। शोध का नेतृत्व आईआईटी रुड़की के रसायन विज्ञान विभाग के प्रो. देबाशीष बनर्जी ने किया।
वैज्ञानिकों ने निकेल-आधारित उत्प्रेरक प्रक्रिया विकसित की, जिसके माध्यम से जैव-आधारित अल्कोहलों को औद्योगिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कार्बनिक यौगिकों में परिवर्तित किया गया। इन यौगिकों का उपयोग औषधि उद्योग तथा उन्नत सामग्री विज्ञान में व्यापक रूप से किया जाता है। प्रो. देबाशीष बनर्जी ने कहा कि उनका उद्देश्य ऐसी उत्प्रेरक प्रणाली विकसित करना था, जो आसानी से उपलब्ध नवीकरणीय अल्कोहलों को कम लागत वाले निकेल उत्प्रेरक की सहायता से उच्च चयनात्मकता के साथ औद्योगिक रूप से उपयोगी जटिल अणुओं में परिवर्तित कर सके। उन्होंने कहा कि यह अध्ययन भविष्य में नवीकरणीय संसाधनों पर आधारित उत्प्रेरक रसायन के विकास के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक आधार भी प्रदान करता है।
शोधकर्ताओं ने इस तकनीक से 27 प्रकार के महत्वपूर्ण कार्बनिक यौगिकों तथा 23 अन्य उच्च-चयनात्मक यौगिकों का सफल संश्लेषण किया। इसके अलावा डीएल-गैलेक्टोज़, विटामिन-ई, टैमोक्सीफेन के समान यौगिकों तथा अन्य जैविक रूप से महत्वपूर्ण पदार्थों पर भी इस तकनीक की उपयोगिता का सफल प्रदर्शन किया गया। आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. केके पंत ने कहा कि रसायन विज्ञान में मूलभूत अनुसंधान स्वच्छ और टिकाऊ प्रौद्योगिकियों के विकास की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि वैश्विक वैज्ञानिक चुनौतियों के समाधान तथा सतत रासायनिक संश्लेषण के क्षेत्र में संस्थान की अनुसंधान क्षमता को दर्शाती है।



