उत्तराखंड

उत्तराखंड: महिला स्वयं सहायता समूहों को मिल सकता है बड़ा आर्थिक संबल, स्कूलों की ड्रेस और पुलिस की वर्दी सिलने का काम सौंपने की तैयारी

Dehradun, 20 September, 2026। उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में महिला स्वयं सहायता समूहों की आजीविका को सशक्त बनाने के लिए सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। इसके तहत अब इन समूहों की महिलाओं को स्कूल ड्रेस और पुलिस कर्मियों की वर्दी तैयार करने जैसे नियमित कार्यों से जोड़ने की योजना पर विचार किया जा रहा है। ग्राम्य विकास विभाग को इस संबंध में विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि महिलाओं को गांवों में ही सालभर स्थायी रोजगार और बेहतर आय के अवसर मिल सकें। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े महिला समूहों के लिए रोजगार के नए क्षेत्र तलाशने के निर्देश ग्राम्य विकास विभाग को दिए गए हैं।

विभाग को स्कूल ड्रेस और पुलिस वर्दी के निर्माण से संबंधित विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया है। योजना को अंतिम रूप मिलने के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सकता है। सरकार का मानना है कि सरकारी विभागों की जरूरतों को महिला समूहों की उत्पादन क्षमता से जोड़ने पर उन्हें बाजार की तलाश में भटकना नहीं पड़ेगा। स्कूल ड्रेस और पुलिस वर्दी जैसे कामों में बड़े और नियमित ऑर्डर मिलने की संभावना है। इससे महिलाओं को सिलाई-कटाई का स्थायी काम मिलने के साथ उनकी आय में भी वृद्धि हो सकती है। साथ ही गांवों में ही रोजगार उपलब्ध होने से स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। फिलहाल प्रदेश के महिला स्वयं सहायता समूह कृषि, औद्यानिकी, मसाले, स्थानीय खाद्य पदार्थ, हस्तशिल्प और विभिन्न घरेलू उत्पादों के निर्माण एवं विपणन से जुड़े हैं।

सरकार अब इन समूहों की मौजूदा क्षमता को बड़े संस्थागत बाजार से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए प्रशिक्षण, सिलाई-कटाई की दक्षता, गुणवत्ता मानक, कच्चे माल की उपलब्धता और उत्पादन क्षमता जैसे पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाएगा। महिला समूहों के लिए रोजगार के अवसरों का दायरा स्कूल ड्रेस और पुलिस वर्दी तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में भी समूहों को उद्यमिता से जोड़ने की संभावनाएं तलाश रही है। दुग्ध उत्पादन के साथ दूध के प्रसंस्करण, पैकेजिंग और पशुपालन आधारित अन्य गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजना है।

महिला स्वयं सहायता समूहों को सरकारी विभागों की जरूरतों से जोड़ने से उन्हें नियमित बाजार उपलब्ध कराया जा सकता है। इससे सरकारी खरीद में स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। इस पूरी व्यवस्था की रूपरेखा तैयार कर इसे चरणबद्ध ढंग से लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।              भरत सिंह चौधरी, ग्राम्य विकास मंत्री

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