हिमालयी ग्लेशियरों से मंडराया ‘ग्लोफ’ का खतरा, उत्तराखंड में 13 संवेदनशील झीलें चिन्हित, सबसे ज्यादा जोखिम में पिथौरागढ़

Dehradun, 23 August, 2026। हिमालय की चोटियों पर तेजी से पिघलते ग्लेशियर अब नदियों के जीवन के साथ-साथ एक नई आपदा का सबब बन रहे हैं। आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग के ताजा अध्ययन में प्रदेश की 13 ग्लेशियर झीलों को अति-संवेदनशील चिन्हित किया गया है, जिनसे ‘ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड’ (GLOF) यानी झील टूटने का गंभीर खतरा है।
सर्वाधिक 6 जोखिम वाली झीलें सीमांत जिले पिथौरागढ़ में हैं, जबकि चमोली की 4 झीलों समेत राज्य की सबसे खतरनाक झीलों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण शुरू कर दिया गया है ताकि नीचे बसे इलाकों को बड़ी तबाही से बचाया जा सके। पिथौरागढ़ की छह जोखिम वाली झीलों में मबांग लेक, स्यांतयांकी लेक, प्युनग्रू लेक और एक बिना नाम वाली झील को ‘ए’ श्रेणी में रखा गया है, जबकि दो झीलें ‘बी’ श्रेणी की हैं। ये झीलें दारमा, लासर यांग्ती और कुथी यांग्ती जैसी ऊंची हिमालयी घाटियों में स्थित हैं। इन क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदलता है और भारी बारिश, ग्लेशियर के तेजी से पिघलने अथवा बर्फ-चट्टानों के झील में गिरने से प्राकृतिक बांध कमजोर होने का खतरा बना रहता है। ऐसी स्थिति में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (ग्लोफ) की घटना हो सकती है।
झील का पानी अचानक नीचे की ओर बहने पर नदी घाटियों में बाढ़ का वेग कई गुना बढ़ सकता है। सीमांत क्षेत्रों में इन झीलों की संवेदनशीलता इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इनके नीचे आबादी के साथ सड़कें, पुल और अन्य महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग मौजूद हैं। चमोली जिले में भी चार ग्लेशियर झीलें जोखिम वाली श्रेणी में दर्ज की गई हैं। इनमें सरस्वती लेक, दो बिना नाम वाली झीलें और केदार ताल शामिल हैं। एक झील को एक, एक को ‘बी’ और दो को ‘सी’ श्रेणी में रखा गया है। इसके अलावा चमोली की वसुधारा ताल का वैज्ञानिक सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है। इससे झील की गहराई, जल क्षमता और ग्लेशियोलॉजिकल स्थिति को समझने में मदद मिली है।
राज्य स्तर पर अब तक चार ग्लोफ संभावित झीलों का विस्तृत सर्वेक्षण पूरा किया गया है। इनमें चमोली में वसुधारा ताल तथा पिथौरागढ़ की मबांग, स्यांतयांकी और प्युनग्रू झील शामिल हैं। वसुधारा ताल में बाथीमेट्री और ग्लेशियोलॉजिकल अध्ययन किया गया, जबकि पिथौरागढ़ की तीनों झीलों में भी ग्लेशियोलॉजिकल अध्ययन के साथ विशेष वैज्ञानिक सर्वे कराया गया।



