उत्तराखंड

‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी: सीएम धामी

Haridwar, 24 August, 2026। हरिद्वार के अवधूत मंडल आश्रम में आयोजित संत समागम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ को देश के निरंतर विकास और सुशासन के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि बार-बार होने वाले चुनावों से प्रशासनिक संसाधनों और सार्वजनिक धन की बर्बादी होती है, जिससे विकास कार्य प्रभावित होते हैं। मुख्यमंत्री ने इसे राजनीति से परे राष्ट्रहित का मुद्दा बताते हुए संत समाज से इस राष्ट्रीय विषय पर जन-जागरण और समाज का मार्गदर्शन करने का आह्वान किया।

रविवार को हरिद्वार के अवधूत मंडल आश्रम में आयोजित संत समागम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और चुनाव लोकतंत्र में पर्व के समान हैं। हालांकि, लगातार चलने वाली चुनावी प्रक्रिया का प्रभाव शासन, प्रशासन और विकास कार्यों पर भी पड़ता है। ऐसे में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की व्यवस्था लोकतंत्र को अधिक प्रभावी और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बार-बार चुनाव होने पर आचार संहिता लागू होती है। इसके कारण बड़ी संख्या में प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षकों, पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों को चुनाव संबंधी दायित्वों में लगाया जाता है।

चुनावी प्रक्रिया में सरकारी मशीनरी का महत्वपूर्ण समय और संसाधन खर्च होते हैं। कई बार नई योजनाओं की घोषणा और विकास कार्यों की गति भी प्रभावित होती है। यदि एक साथ चुनाव कराने से सार्वजनिक धन की बचत होती है और प्रशासनिक संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होता है तो इसका सीधा लाभ आम जनता को मिल सकता है। कहा कि ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ की व्यवस्था पर व्यापक विचार-विमर्श और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ने की आवश्यकता है। यह व्यवस्था लागू होती है तो चुनावी गतिविधियों में बार-बार लगने वाले समय और संसाधनों को बचाकर शासन का ध्यान लंबे समय तक विकास कार्यों पर केंद्रित किया जा सकता है।

धामी ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव आवश्यक हैं, लेकिन शासन व्यवस्था का अधिकतम समय जनसेवा और विकास के लिए इस्तेमाल होना चाहिए। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सड़क, पेयजल, आधारभूत ढांचे और गरीबों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं को निरंतर गति देने के लिए प्रशासनिक व्यवस्था का प्रभावी रहना जरूरी है। बार-बार चुनाव होने पर अधिकारियों और कर्मचारियों की बड़ी संख्या चुनाव ड्यूटी में लगती है, जिससे विकास योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन प्रभावित हो सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ के विषय को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में लाकर महत्वपूर्ण पहल की है। विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने के लिए देश को विकास की निरंतर गति बनाए रखनी होगी। भारत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। ऐसे समय में उपलब्ध मानव संसाधन, प्रशासनिक क्षमता और सार्वजनिक धन का अधिकतम उपयोग राष्ट्र निर्माण में किया जाना चाहिए।

धामी ने संत-महात्माओं से इस राष्ट्रीय विषय पर समाज का मार्गदर्शन करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भारत की सनातन परंपरा में संत समाज ने हमेशा राष्ट्र और समाज को दिशा देने का कार्य किया है। संतों की बात समाज के विभिन्न वर्गों तक प्रभावी ढंग से पहुंचती है, इसलिए वे ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ जैसे विषय पर तथ्यात्मक जानकारी और सकारात्मक संवाद को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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