
Dehradun, 25 September, 2026। टिहरी झील के आसपास हो रहे अनियोजित निर्माण और बेतरतीब विकास पर अब ब्रेक लगाने की तैयारी है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सचिवालय में हुई बैठक में लगभग 8,000 हेक्टेयर क्षेत्र को शामिल करते हुए एक समग्र मास्टर और जोनल प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य झील को ‘वन स्टेट, वन GLOBAL डेस्टिनेशन’ के रूप में विकसित करना और पर्यावरण संरक्षण के साथ पर्यटन गतिविधियों में संतुलन बनाए रखना है। मास्टर प्लान में सरकारी के साथ निजी भूमि को भी शामिल किया जाएगा। इसका उद्देश्य झील के आसपास अलग-अलग हिस्सों में बिना किसी दीर्घकालिक योजना के होने वाले विकास को नियंत्रित करना है।
क्षेत्र की जरूरत के अनुसार अलग-अलग जोन निर्धारित किए जाएंगे, ताकि पर्यटन गतिविधियों, निर्माण, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय जरूरतों के बीच संतुलन कायम किया जा सके। इससे भविष्य में झील क्षेत्र में किस स्थान पर किस तरह की गतिविधि या विकास किया जा सकेगा, इसका स्पष्ट खाका तैयार होने की उम्मीद है। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि मास्टर प्लान केवल विभागीय स्तर पर तैयार न हो, बल्कि स्थानीय लोगों समेत सभी संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श किया जाए। योजना बनाते समय क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों, पर्यावरणीय संवेदनशीलता, स्थानीय आवश्यकताओं और पर्यटन की संभावनाओं को ध्यान में रखा जाए। तकनीकी विशेषज्ञता के लिए स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए), नई दिल्ली और एसपीए, भोपाल से सहयोग लेने की संभावनाएं भी तलाशने को कहा गया है। मुख्य सचिव ने टिहरी झील क्षेत्र के विकास की समग्र कार्ययोजना और प्रस्तावित गतिविधियों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण तैयार करने को कहा है, जिसे प्रधानमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके।
अगली बैठक में टीएचडीसी के अधिकारियों को भी आमंत्रित किया जाएगा, ताकि झील क्षेत्र के विकास से जुड़े विषयों पर समन्वित रूप से चर्चा की जा सके। इस अवसर पर सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल, एपीसीसीएफ डॉ. विवेक पाण्डेय, सुरेन्द्र मेहरा, सीसीएफ प्रसन्ना कुमार पात्रो, अपर सचिव विनीत कुमार, हिमांशु खुराना, अभिषेक रोहिला एवं जिलाधिकारी टिहरी नितिका खण्डेलवाल उपस्थित रहीं।
सरकार की योजना पर्यटकों को केवल झील के आसपास कुछ घंटे बिताने के बजाय एक-दो दिन या उससे अधिक समय तक रोकने की है। इसके लिए नए ट्रैकिंग रूट और ट्रेल विकसित करने तथा आसपास के गांवों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने की योजना है। विलेज और कल्चरल विजिट के माध्यम से पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति, परंपराओं, खान-पान और ग्रामीण जीवन से परिचित कराया जाएगा। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी विकसित किए जा सकेंगे।
टिहरी झील को ‘वन स्टेट, वन ग्लोबल डेस्टिनेशन’ के रूप में विकसित करने के लिए पूरे लेक एरिया में प्रमुख आकर्षण केंद्र यानी मैगनेट एरिया विकसित किए जाएंगे। इसके लिए फेजवाइज प्लान तैयार होगा, ताकि प्राथमिकता के आधार पर परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा सके। वाटर स्पोर्ट्स के साथ एडवेंचर, ट्रैकिंग, नेचर, कल्चर और विलेज टूरिज्म को एकीकृत रूप से विकसित करने पर जोर दिया गया है।
अप्रैल, मई और जून में टिहरी झील का जलस्तर कम रहने के दौरान भी पर्यटन गतिविधियां प्रभावित न हों, इसके लिए विशेष कार्ययोजना बनाई जाएगी। मौसम और जलस्तर के अनुसार पूरे वर्ष की गतिविधियों का कैलेंडर तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।



