उत्तराखंडपर्यटन

नेलांग घाटी: अब सर्दियों में भी देख सकेंगे ‘सफेद रेगिस्तान’, 1 दिसंबर से शुरू होगा विंटर टूरिज्म

Dehradun, 05 October, 2026।  उत्तराखंड का प्रसिद्ध गंगोत्री नेशनल पार्क और इसकी सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नेलांग घाटी इस बार इतिहास रचने जा रही है। पहली बार 1 दिसंबर से नेलांग घाटी को सर्दियों में पर्यटकों के लिए खोला जा रहा है। वन विभाग की इस पहल से न केवल पर्यटक हिमालय के बर्फ से ढके ठंडे रेगिस्तानी परिदृश्य और ऐतिहासिक गर्तांग गली का दीदार कर सकेंगे, बल्कि स्नो लेपर्ड टूरिज्म के जरिए स्थानीय लोगों के लिए सालभर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। वन विभाग ने नेलांग घाटी को सर्दियों में पर्यटन के लिए खोलने की पूरी तैयारी कर ली है। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक एवं प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) नीना ग्रेवाल ने बताया कि नेलांग घाटी को सर्दियों में खोलने से यहां के बर्फ से ढके प्राकृतिक परिदृश्य को पर्यटकों के सामने प्रस्तुत किया जा सकेगा। इसके साथ ही स्नो लेपर्ड टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने बताया कि स्थानीय निवासियों को इस क्षेत्र में पर्यटन संबंधी आवश्यक कौशल विकसित करने के लिए लद्दाख भेजा जा रहा है। वहां से प्रशिक्षण प्राप्त कर लौटने वाले स्थानीय लोग भविष्य में वन्यजीव पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों में भूमिका निभा सकेंगे। ऐसे में नेलांग घाटी में शुरू होने जा रहा विंटर टूरिज्म हिमालयी पर्यटन को सालभर विस्तार देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। नेलांग घाटी अपनी विशिष्ट भौगोलिक संरचना के लिए जानी जाती है। यह क्षेत्र ठंडे रेगिस्तान जैसी प्राकृतिक बनावट, पहाड़ी भूभाग और ऐतिहासिक विरासत को समेटे हुए है। कभी भारत और तिब्बत के बीच व्यापार का प्रमुख मार्ग रही इस घाटी का ऐतिहासिक महत्व भी है। यहां स्थित करीब 150 वर्ष पुराना गर्तांग गली का लकड़ी का पुल पर्यटकों के प्रमुख आकर्षणों में शामिल है। चट्टानों को काटकर बनाया गया यह पुल क्षेत्र की ऐतिहासिक और स्थापत्य विरासत को दर्शाता है।

वन विभाग के प्रमुख सचिव आरके सुधांशु ने मैकिन्से के एक आकलन का हवाला देते हुए बताया कि वन्यजीव पर्यटन के लिए आने वाले पर्यटक सामान्य पर्यटकों की तुलना में पांच से छह गुना अधिक खर्च करते हैं। उन्होंने कहा कि विभाग का फोकस टिकाऊ वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा देने पर है। नेलांग घाटी में शीतकालीन पर्यटन शुरू होने से स्थानीय युवाओं को गाइड, पर्यटन सहायक और अन्य सेवाओं से जोड़ने की संभावनाएं बनेंगी। स्नो लेपर्ड जैसे दुर्लभ वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखते हुए पर्यटन विकसित करना इस पहल का महत्वपूर्ण पहलू होगा।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button