
Dehradun, 07 October, 2026। उत्तराखंड देश का छठवां पूर्ण साक्षर राज्य बन गया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शिक्षा के अगले चरण की प्राथमिकताओं को रेखांकित किया। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अब राज्य में केवल साक्षरता ही नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता, तकनीकी दक्षता और प्रयोगात्मक पढ़ाई पर ध्यान दिया जाएगा। इसके तहत प्रदेश के 200 हाईस्कूल और इंटरमीडिएट विद्यालयों में आधुनिक प्रयोगशालाएं तथा 500 स्कूलों में वर्चुअल क्लासरूम विकसित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलते समय में केवल किताबों के माध्यम से शिक्षा देना पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को विषयों की व्यावहारिक जानकारी और तकनीकी समझ भी जरूरी है। आधुनिक प्रयोगशालाओं के माध्यम से खासतौर पर विज्ञान और प्रयोगात्मक विषयों की पढ़ाई को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। इससे विद्यार्थियों को स्कूल स्तर पर ही प्रयोग करने, विषयों को समझने और अपनी रुचि के अनुसार आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।
मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम में धामी ने कहा कि उत्तराखंड का पूर्ण साक्षर राज्य बनना प्रत्येक प्रदेशवासी के लिए गौरव की उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि शिक्षकों, विद्यार्थियों, नव-साक्षरों, स्वयंसेवकों और अभियान से जुड़े लोगों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। उत्तराखंड देश का छठवां पूर्ण साक्षर राज्य बना है। इससे पहले मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किए जा चुके हैं। इस अवसर पर विधायक सविता कपूर, अपर सचिव भारत सरकार अर्चना शर्मा अवस्थी, सचिव शिक्षा ज्योति यादव, अपर सचिव नमामि बंसल एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने शिक्षा क्षेत्र में चल रहे अन्य प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि राज्य के 500 विद्यालयों में वर्चुअल क्लासरूम और सेंट्रल स्टूडियो की व्यवस्था की जा रही है। इसका उद्देश्य दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों तक भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आधुनिक शिक्षण सामग्री पहुंचाना है।
प्रदेश में 189 अटल उत्कृष्ट विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। नंदा गौरा योजना के माध्यम से पात्र छात्राओं को प्रोत्साहन राशि दी जा रही है, जबकि मुख्यमंत्री बालाश्रय योजना के तहत अनाथ बच्चों की निःशुल्क शिक्षा सुनिश्चित की जा रही है। धामी ने कहा कि आज के समय में साक्षरता का अर्थ केवल पढ़ना-लिखना या हस्ताक्षर करना नहीं है। डिजिटल और वित्तीय साक्षरता, स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता तथा जीवनोपयोगी कौशल भी इसके महत्वपूर्ण हिस्से हैं। उन्होंने कहा कि पूर्ण साक्षरता को मंजिल नहीं, बल्कि नई शुरुआत के रूप में देखा जाना चाहिए। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि पूर्ण साक्षरता अभियान को सफल बनाने में करीब 25 हजार स्वयंसेवकों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने बताया कि अगले छह माह में राज्य को शत-प्रतिशत साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रत्येक बच्चे तक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है और जिस गांव में एक भी बच्चा पढ़ने वाला होगा, वहां विद्यालय बंद नहीं किया जाएगा।



