उत्तराखंड में वन्यजीव सुरक्षा का ‘हाईटेक’ मॉडल: संवेदनशील क्षेत्रों में बिछेगा AI का जाल, CM धामी ने दिए निर्देश

देहरादून। उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और जंगलों की सुरक्षा को आधुनिक बनाने के लिए राज्य सरकार ने तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली को बड़े पैमाने पर लागू करने का फैसला किया है। सचिवालय में आयोजित राज्य वन्यजीव बोर्ड की बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि संवेदनशील वन क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कैमरा ट्रैप और ड्रोन का व्यापक विस्तार किया जाए। इसका मुख्य उद्देश्य वन्यजीवों की गतिविधियों पर सटीक नजर रखना, संभावित खतरों की समय रहते पहचान करना और वनाग्नि जैसी चुनौतियों से निपटना है। शुक्रवार को सचिवालय स्थित विश्वकर्मा भवन में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित राज्य वन्यजीव बोर्ड और राज्य स्तरीय बाघ संचालन समिति की बैठक में वन्यजीव संरक्षण, वन्यजीव गलियारों की सुरक्षा और मानव-वन्यजीव संघर्ष को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड जैव विविधता और वन्यजीव संपदा की दृष्टि से देश का अग्रणी राज्य है। ऐसे में वन्यजीव संरक्षण के लिए आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक प्रबंधन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य के संवेदनशील वन क्षेत्रों में कैमरा ट्रैप नेटवर्क को और मजबूत किया जाए। एआई आधारित निगरानी प्रणाली विकसित कर वन्यजीवों की गतिविधियों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाए, जबकि दुर्गम क्षेत्रों की निगरानी के लिए ड्रोन का प्रभावी उपयोग किया जाए। बैठक में बताया गया कि राज्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया दल (क्यूआरटी) पहले से कार्यरत हैं। इनके अलावा कैमरा ट्रैप, ड्रोन, सर्प बचाव किट और सोलर लाइट जैसी आधुनिक व्यवस्थाओं का उपयोग किया जा रहा है।
प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी तंत्र को मजबूत करने, वन कर्मियों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने और राहत कार्यों को तेज करने के लिए भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्यजीवों के हमले में मृतक और घायल व्यक्तियों के परिजनों को निर्धारित मानकों के अनुसार समयबद्ध मुआवजा उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने सभी स्वीकृत विकास परियोजनाओं में वन्यजीव संरक्षण संबंधी शर्तों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखते हुए आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक प्रबंधन और जनसहभागिता के माध्यम से उत्तराखंड में वन्यजीव संरक्षण को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।



