रिटायरमेंट के बाद भी नई पारी: NCS पोर्टल पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए 1.68 लाख से अधिक नौकरियां उपलब्ध

देहरादून। कहते हैं सीखने और काम करने की कोई उम्र नहीं होती—अनुभव, जज्बा और जुनून हो तो जीवन के किसी भी पड़ाव पर नई शुरुआत की जा सकती है। रिटायरमेंट के बाद सम्मानजनक आजीविका की तलाश कर रहे वरिष्ठ नागरिकों के लिए केंद्र सरकार का ‘नेशनल करियर सर्विस’ (NCS) पोर्टल एक नई उम्मीद बनकर उभरा है। वर्तमान में इस पोर्टल पर 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के अनुभवी लोगों के लिए 1.68 लाख से अधिक नौकरियों के अवसर उपलब्ध हैं।
केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार के अनुसार, सरकार ‘एक्टिव एजिंग’ को बढ़ावा देने और बुजुर्गों के अनुभव का लाभ उठाने के लिए लगातार प्रयासरत है, ताकि बढ़ती बुजुर्ग आबादी को समाज और अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा से जोड़े रखा जा सके। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने इस बारे में जानकारी साझा करते हुए बताया कि सरकार सक्रिय वृद्धावस्था (एक्टिव एजिंग) को बढ़ावा देने और वरिष्ठ नागरिकों को दोबारा रोजगार से जोड़ने के लिए लगातार काम कर रही है। अब देश में वरिष्ठ नागरिकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। सरकार ने राज्यों और विभिन्न संस्थानों के सहयोग से 407 मॉडल करियर सेंटर (एमसीसी) स्थापित किए हैं।
ये केंद्र रोजगार मेले, करियर परामर्श, कौशल विकास और एनसीएस पोर्टल के माध्यम से युवाओं के साथ-साथ वरिष्ठ नागरिकों को भी रोजगार से जोड़ने का काम कर रहे हैं। वर्ष 2015 में शुरू किए गए एनसीएस पोर्टल पर अब तक 6.46 करोड़ से अधिक नौकरी चाहने वालों और 58.76 लाख नियोक्ताओं ने पंजीकरण कराया है।
पोर्टल के माध्यम से 2.29 करोड़ से अधिक उम्मीदवारों को विभिन्न संस्थानों और कंपनियों ने शॉर्टलिस्ट भी किया है। 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक एनसीएस पोर्टल पर निःशुल्क पंजीकरण कर सकते हैं। प्रोफाइल बनाने के बाद योग्यता और अनुभव के अनुसार नौकरी के अवसर दिखाई देते हैं। पोर्टल पर पंजीकरण के लिए अधिकतम आयु सीमा निर्धारित नहीं है, हालांकि अंतिम चयन और आयु संबंधी शर्तें संबंधित नियोक्ता और पद के नियमों के अनुसार तय होती हैं। इसके अलावा नजदीकी मॉडल करियर सेंटर (एमसीसी) से भी पंजीकरण, करियर परामर्श और रोजगार संबंधी सहायता प्राप्त की जा सकती है। भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय और जनगणना आधारित आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड में 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के लगभग आठ लाख वरिष्ठ नागरिक हैं, जो राज्य की कुल आबादी का करीब 8.8 प्रतिशत हैं।
यूएनएफपीए-भारत की इंडिया एजिंग रिपोर्ट-2023 के अनुसार वर्ष 2022 में 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों की आबादी देश की कुल आबादी का 10.4 प्रतिशत थी। यह आंकड़ा 2050 तक 20.8 प्रतिशत और सदी के अंत तक 36 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। ऐसे में बुजुर्गों के लिए सम्मानजनक आजीविका और पुनर्रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना समय की आवश्यकता है



