
Dehradun, 10 October, 2026। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत के एक सोशल मीडिया बयान ने राज्य की राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। पार्टी में अपनी प्रासंगिकता और वफादारी का जिक्र करते हुए उन्होंने दो टूक कहा है कि वह टूट सकते हैं, लेकिन कांग्रेस का साथ कभी नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि नेतृत्व उन्हें पार्टी के लिए बोझ मानता है, तो वह घर बैठने को भी तैयार हैं, हालांकि अपने राजनीतिक महत्व का आकलन करने का अंतिम निर्णय उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर ही छोड़ दिया है।
अपने इस बयान के जरिए उन्होंने एक बार फिर अपनी राजनीतिक स्थिति और भविष्य की भूमिका को लेकर खुलकर अपनी बात रखी है। सोशल मीडिया में जारी बयान में उन्होंने कहा कि वर्ष 2002 और 2012 में भी उन्होंने कठिन राजनीतिक परिस्थितियों का सामना किया, लेकिन कांग्रेस का साथ नहीं छोड़ा। पार्टी ने उन्हें केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री जैसी जिम्मेदारियां देकर सम्मानित किया। रावत ने भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सीबीआइ और ईडी जैसी एजेंसियों के माध्यम से उन्हें निशाना बनाया गया।
उन्होंने दावा किया कि भाजपा आज भी उन्हें अपना राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी मानती है और उनकी छवि खराब करने के लिए इंटरनेट मीडिया पर चार-चार पेज तक समर्पित किए जा रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने पार्टी के भीतर प्रतिस्पर्धा का जिक्र करते हुए कहा कि वह खुद को कांग्रेस के लिए पूरक मानते हैं। उनका इस्तेमाल करना है या नहीं, यह निर्णय नेतृत्व को करना है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग उन्हें पीछे खींचने की कोशिश करते हैं, जबकि वह पार्टी के लिए काम करने को तैयार हैं।
लालकुआं और किच्छा क्षेत्र के हालिया दौरों का उल्लेख करते हुए रावत ने कहा कि लोग उनसे मिलकर चुनाव में हार को लेकर सवाल कर रहे हैं। उनके मुताबिक, मतदाता अब हार के कारणों पर खुलकर अपनी राय रख रहे हैं। उनके बयान को कांग्रेस में अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने और नेतृत्व के सामने अपनी उपलब्धता जताने के संदेश के रूप में देखा जा रहा है।



