एलपीजी आपूर्ति सुधारने के लिए केंद्र ने लिया बड़ा कदम, पीएनजी कनेक्शनधारकों को देना होगा एलपीजी सरेंडर

देहरादून। रसोई गैस की बढ़ती मांग और आपूर्ति पर बढ़ते दबाव को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। नए संशोधित एलपीजी नियंत्रण आदेश के तहत अब जिन उपभोक्ताओं के पास पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन उपलब्ध है, उन्हें अपना घरेलू एलपीजी कनेक्शन अनिवार्य रूप से सरेंडर करना होगा। सरकार का मानना है कि इस कदम से गैस की मांग पर दबाव कम होगा और उन क्षेत्रों में आपूर्ति बेहतर हो सकेगी, जहां पीएनजी सुविधा अभी उपलब्ध नहीं है। साथ ही, यह निर्णय शहरों में एलपीजी और पीएनजी के दोहरे उपयोग से उत्पन्न वितरण असंतुलन को भी दूर करेगा और जरूरी क्षेत्रों में समय पर गैस पहुंचाने में मदद करेगा।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मुताबिक, कई शहरों में बड़ी संख्या में ऐसे उपभोक्ता पाए गए हैं जो पीएनजी सुविधा होने के बावजूद एलपीजी सिलेंडर का भी उपयोग कर रहे हैं। इससे गैस वितरण व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बनता है और जरूरतमंद क्षेत्रों में आपूर्ति प्रभावित होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पीएनजी उपभोक्ताओं के लिए नए एलपीजी कनेक्शन जारी करने पर भी रोक लगा दी है।
सरकार लगातार वैकल्पिक ईंधन के रूप में पीएनजी को बढ़ावा दे रही है। सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) कंपनियों के माध्यम से शहरी क्षेत्रों में घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उपभोक्ता ईमेल, पत्र या संबंधित कंपनियों के ऑनलाइन पोर्टल के जरिए आसानी से आवेदन कर सकते हैं। हाल ही में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने पीएनजीआरबी और सीजीडी कंपनियों के साथ बैठक कर कनेक्शन विस्तार और एलपीजी से पीएनजी में बदलाव की प्रक्रिया की समीक्षा भी की।
डिजिटल प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया है। सरकार ने उपभोक्ताओं को आईवीआरएस कॉल, एसएमएस, व्हाट्सएप और मोबाइल एप के जरिए गैस बुकिंग करने की सलाह दी है। हाल के आंकड़ों के अनुसार देश में करीब 87 प्रतिशत गैस बुकिंग अब ऑनलाइन माध्यम से हो रही है, जो डिजिटल व्यवस्था के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है। एलपीजी आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने के लिए सरकार ने निगरानी भी कड़ी कर दी है। कई राज्यों में जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए छापेमारी अभियान चलाए जा रहे हैं। आंध्र प्रदेश, बिहार समेत विभिन्न राज्यों में प्रशासन को अवैध भंडारण पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं, जो पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की आपूर्ति पर लगातार नजर रख रहे हैं।



