
ऊखीमठ। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में सर्वोच्च भगवान केदारनाथ की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली ने रविवार को अपने शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर से कैलाश (केदारनाथ धाम) के लिए प्रस्थान कर दिया है। इस पावन अवसर पर समूचा ऊखीमठ क्षेत्र वेद ऋचाओं, भक्तों के जयकारों और आर्मी बैंड की मधुर धुनों से गुंजायमान रहा। डोली प्रस्थान के लिए ओंकारेश्वर मंदिर को 8 कुंतल देशी-विदेशी फूलों से भव्य रूप से सजाया गया था।
रविवार सुबह ब्रह्म बेला में विद्वान आचार्यों ने पंचांग पूजन के साथ 33 कोटि देवी-देवताओं का आवाहन किया और विश्व शांति की कामना की। सुबह 9 बजे बाबा की पंचमुखी प्रतिमा का विशेष श्रृंगार किया गया। इसके बाद रावल भीमाशंकर लिंग ने प्रधान पुजारी टी. गंगाधर लिंग को पगड़ी और अचकन पहनाकर आगामी छह माह तक धाम में प्रवास और पूजा-अर्चना का संकल्प दिलाया। शनिवार देर शाम भगवान भैरवनाथ की पूजा संपन्न की गई, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से आए असंख्य भक्तों ने हिस्सा लिया। रविवार सुबह ठीक 9:30 बजे जैसे ही डोली ने मंदिर की परिक्रमा कर प्रस्थान किया, श्रद्धालु आर्मी बैंड की धुन पर झूमने लगे और पुष्प वर्षा के बीच बाबा को विदा किया। इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने के लिए हजारों की संख्या में भक्त ऊखीमठ पहुंचे हैं। स्थानीय महिलाओं के भजनों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों ने वातावरण को पूरी तरह शिवमय बना दिया है। प्रशासन और मंदिर समिति ने यात्रा के निर्विघ्न संचालन के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं।



