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केदारनाथ में उमड़ा आस्था का महाकुंभ: 3 दिन में 90 हजार श्रद्धालु पहुंचे, आधी रात को मोर्चा संभालने ग्राउंड जीरो पर उतरे DM-SSP

रुद्रप्रयाग/केदारनाथ: बाबा केदार के दर्शनों के लिए इस बार रिकॉर्ड तोड़ भीड़ उमड़ रही है। यात्रा के शुरुआती महज 72 घंटों में 90,000 से ज्यादा श्रद्धालु धाम पहुंच चुके हैं। भीड़ के जबरदस्त दबाव को देखते हुए रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा और पुलिस अधीक्षक नीहारिका तोमर ने खुद कमान संभाल ली है। देर रात कड़ाके की ठंड के बीच दोनों अधिकारियों ने पैदल मार्ग और धाम की व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया।

जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी है कि किसी भी श्रद्धालु को कोई समस्या होने पर उसका समाधान अधिकतम 10 मिनट के भीतर होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि दुर्गम परिस्थितियों में किसी भी तरह की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और लापरवाही मिलने पर तत्काल कड़ी कार्रवाई होगी।

यात्रा के शुरुआती दौर में ही रिकॉर्ड भीड़ उमड़ने से स्वास्थ्य, बिजली, पेयजल और भीड़ नियंत्रण जैसी व्यवस्थाओं की कड़ी परीक्षा हो रही है। प्रशासन को अंदेशा था कि इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से छोटी समस्या भी बड़ा संकट बन सकती है, इसलिए तुरंत सख्त रणनीति लागू की गई। पुलिस अधीक्षक नीहारिका तोमर ने भीड़ नियंत्रण को सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए मंदिर परिसर और यात्रा मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने के निर्देश दिए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई है और किसी भी अव्यवस्था पर तुरंत कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। अनधिकृत ड्रोन और भ्रामक सोशल मीडिया गतिविधियों पर भी सख्त नजर रखी जा रही है। देर रात कड़ाके की ठंड में डीएम और एसएसपर ने खुद धाम पहुंचकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया और मौके पर अधिकारियों के साथ बैठक कर सख्त निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि केदारनाथ जैसे दुर्गम क्षेत्र में देरी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होगी। उन्होंने “10 मिनट समाधान मॉडल” को सख्ती से लागू करने और इसकी नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए हैं। लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई तय है। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने श्रद्धालुओं से संवाद कर व्यवस्थाओं का फीडबैक भी लिया, जिसमें कई यात्रियों ने प्रशासन की तत्परता की सराहना की। प्रशासन की सक्रियता का असर अब नजर आने लगा है।

आस्था के इस महाकुंभ में उमड़ी रिकॉर्ड तोड़ भीड़ के बीच प्रशासन का मैनेजमेंट काबिले तारीफ नजर आ रहा है। यह महज कागजी दावों तक सीमित नहीं है, बल्कि सिस्टम की जवाबदेही धरातल पर साफ दिखाई दे रही है। केदारनाथ की दुर्गम पहाड़ियों पर जब आला अधिकारी खुद आधी रात को पसीना बहा रहे हों, तो संदेश स्पष्ट है—इस बार प्रशासन केवल ‘आदेश’ नहीं दे रहा, बल्कि ‘अग्रिम पंक्ति’ में खड़े होकर हर बाधा को चुनौती दे रहा है। लक्ष्य केवल एक है: बाबा के दर पर आने वाले हर भक्त की यात्रा सुरक्षित और सुगम हो।

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