‘राजमार्गयात्रा’ ऐप पर डिजिटल लोकल पास और ‘मार्ग मित्र’ सुविधा शुरू

देहरादून। राष्ट्रीय राजमार्गों पर रोजाना सफर करने वाले यात्रियों के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एक बड़ी राहत दी है। सफर को अधिक आसान, तेज, सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से NHAI के ‘राजमार्गयात्रा’ मोबाइल ऐप पर दो नई डिजिटल सुविधाएं- ‘डिजिटल लोकल पास’ और ‘मार्ग मित्र हेल्प सेंटर’—शुरू की गई हैं। इस कदम से न केवल टोल प्लाजा के चक्कर काटने और कागजी कार्रवाई से मुक्ति मिलेगी, बल्कि समय और पैसे दोनों की भारी बचत होगी।
एनएचएआई के अध्यक्ष संतोष कुमार यादव के अनुसार नई व्यवस्था के तहत अब यात्री टोल प्लाजा पर जाए बिना ही अपने मोबाइल से डिजिटल लोकल पास खरीद सकेंगे। फिलहाल इस सुविधा की शुरुआत दिल्ली के अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 स्थित मुंडका-बक्करवाला टोल प्लाजा से की गई है। एनएचएआई का कहना है कि आने वाले महीनों में इसे देशभर के अन्य टोल प्लाजाओं पर भी लागू किया जाएगा। यह सुविधा उन लोगों के लिए सबसे अधिक फायदेमंद होगी जो किसी टोल प्लाजा के 20 किलोमीटर के दायरे में रहते हैं और रोजाना उसी मार्ग से आवागमन करते हैं।
एनएचएआई ने यात्रियों की सुविधा के लिए ‘मार्गमित्र’ हेल्प सेंटर भी शुरू किया है। यह राजमार्गयात्रा ऐप के भीतर एक डिजिटल सहायता केंद्र है, जहां उपयोगकर्ता 22 भारतीय भाषाओं में अपनी समस्या लिख या बोल सकते हैं। ऐप फास्टैग रिचार्ज, केवाईसी, रिफंड, लोकल पास, एनुअल पास और अन्य सामान्य सवालों का तुरंत जवाब देगा। यदि किसी मामले में कार्रवाई की जरूरत होगी तो शिकायत सीधे संबंधित विभाग को भेजी जाएगी। यात्री अपनी शिकायत की रियल टाइम स्थिति भी देख सकेंगे और समाधान से संतुष्ट न होने पर अपील भी कर सकेंगे। इसके अलावा ऐप पर फास्टैग ब्लैकलिस्ट की जानकारी, लंबित ई-नोटिस देखना और राष्ट्रीय राजमार्गों पर खराब वाहन, अतिक्रमण या अन्य सड़क सुरक्षा संबंधी समस्याओं की सूचना देना भी संभव होगा।
एनएचएआई के अनुसार, राजमार्गयात्रा ऐप के माध्यम से अब तक 80 लाख से अधिक एनुअल पास रियल टाइम एक्टिवेशन के साथ जारी किए जा चुके हैं। नई सुविधाओं से यात्रियों का समय और खर्च दोनों बचेंगे, सेवाएं अधिक पारदर्शी होंगी और राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर पहले से कहीं अधिक स्मार्ट, सुविधाजनक और सुरक्षित बन सकेगा। पहले लोकल पास बनवाने के लिए लोगों को टोल प्लाजा पहुंचकर दस्तावेज जमा करने और सत्यापन कराने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। अब पूरी प्रक्रिया मोबाइल ऐप पर ही पूरी हो जाएगी। डिजिलॉकर, वाहन पोर्टल और जीआईएस आधारित सत्यापन की मदद से पात्रता की जांच स्वतः होगी, जिससे समय की बचत होगी और फर्जीवाड़े की संभावना भी कम होगी।


