अवैध निर्माण पर चला MDDA का बुलडोजर, देहरादून में प्लाटिंग ध्वस्त तो ऋषिकेश में पांच मंजिला भवन सील

देहरादून। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) ने अवैध प्लाटिंग और बिना स्वीकृत मानचित्र के हो रहे निर्माण कार्यों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए शनिवार को बड़ी कार्रवाई की। प्राधिकरण की टीम ने देहरादून के सोनिया विहार (नवादा रोड) क्षेत्र में करीब चार बीघा में अवैध रूप से विकसित की जा रही कॉलोनी को ध्वस्त कर दिया, वहीं ऋषिकेश के गुमानीवाला में बिना अनुमति बनाए जा रहे एक पांच मंजिला भवन को सील कर दिया है। MDDA अधिकारियों ने साफ किया है कि शहर के नियोजित विकास से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ यह अभियान लगातार जारी रहेगा। एमडीडीए के अनुसार, देहरादून के सोनिया विहार, नवादा रोड क्षेत्र में बृजेश कुमार, नीलकंठ जोशी, दमयंती कंडवाल, गिरिजा सेमवाल, सुनीता भट्ट और सुरेंद्र सिंह पंवार द्वारा करीब चार बीघा भूमि पर बिना स्वीकृत लेआउट के प्लाटिंग और डिमार्केशन कराया जा रहा था।
जांच में अनधिकृत भू-विकास की पुष्टि होने पर उत्तराखंड नगर एवं ग्राम नियोजन तथा विकास अधिनियम, 1973 (संशोधित) के तहत वाद दर्ज किया गया। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्राधिकरण की टीम ने मौके पर पहुंचकर पूरी अवैध कॉलोनी को ध्वस्त कर दिया। इसी क्रम में ऋषिकेश के गुमानीवाला स्थित नेगी मोहल्ला में भवन स्वामी भावेश जोशी द्वारा बिना स्वीकृत मानचित्र के भूतल से चौथी मंजिल तक बहुमंजिला भवन का निर्माण कराया जा रहा था।
एमडीडीए ने पहले नोटिस जारी कर जवाब मांगा, लेकिन संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने पर भवन को सील कर दिया।एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि प्राधिकरण का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में नियोजित एवं सुरक्षित शहरी विकास सुनिश्चित करना है। बिना स्वीकृति की प्लाटिंग और भवन निर्माण कानून का उल्लंघन होने के साथ भविष्य में आम नागरिकों के लिए भी गंभीर समस्याएं पैदा करते हैं।
उन्होंने कहा कि नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने नागरिकों से अपील की कि किसी भी भूखंड की खरीद या भवन निर्माण से पहले संबंधित मानचित्र और प्राधिकरण की स्वीकृति की पुष्टि अवश्य करें। उन्होंने कहा कि अवैध निर्माण और अनधिकृत प्लाटिंग के खिलाफ नियमित अभियान जारी रहेगा, ताकि शहर का सुनियोजित विकास सुनिश्चित किया जा सके।


