उत्तराखंड

सल्ट में नवविवाहिता की मौत के बाद ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

अल्मोड़ा। कारबेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) से सटे सल्ट क्षेत्र के डभरा सौराल गांव में सोमवार को गोबर डालने गई 21 वर्षीय नवविवाहिता शालिनी की बाघ के हमले में दर्दनाक मौत हो गई। घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने वन विभाग की लापरवाही का आरोप लगाते हुए शव उठाने से इनकार कर दिया और हिंसक बाघ को तत्काल मारने की मांग पर अड़ गए। देर रात तक चले विरोध-प्रदर्शन के बाद प्रशासन द्वारा 10 लाख रुपये का मुआवजा देने, गांव में ही पोस्टमार्टम कराने और हिंसक वन्यजीव के निस्तारण (ट्रैंकुलाइज/पकड़ने) की अनुमति मिलने के आश्वासन पर ही ग्रामीण शांत हुए। इसी दौरान घात लगाए बैठे हिंसक वन्यजीव ने उन पर हमला कर दिया और उन्हें घसीटते हुए करीब दो किलोमीटर दूर मोहान के जंगल में ले गया।

करीब ढाई घंटे बाद ग्रामीणों और वन कर्मियों को उनका क्षत-विक्षत शव मिला। घटना से पूरे गांव में दहशत और आक्रोश फैल गया।
ग्रामीणों का आरोप था कि क्षेत्र में लंबे समय से बाघ और गुलदार की गतिविधियां बढ़ रही हैं, लेकिन वन विभाग ने समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए। नाराज लोगों ने शव उठाने से साफ इनकार कर दिया और मांग की कि पहले हिंसक बाघ को हटाने का ठोस निर्णय लिया जाए। मौके पर पहुंचे डीएफओ दीपक सिंह, एसडीएम रिंकू बिष्ट और एसडीओ काकुल पुंडीर ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन लोग अपनी मांग पर डटे रहे। वार्ता के दौरान वन विभाग ने मृतका के परिजनों को तत्काल 10 लाख रुपये की मुआवजा राशि सौंपी। ग्रामीणों की मांग पर जिलाधिकारी अंशुल सिंह से बातचीत के बाद यह भी तय हुआ कि शैलू देवी का पोस्टमार्टम गांव में ही कराया जाएगा, जिसके लिए रानीखेत से चिकित्सकों की टीम रवाना की गई। डीएफओ दीपक सिंह ने वन्यजीव प्रतिपालक को क्षेत्र की गंभीर स्थिति और लगातार बढ़ रहे मानव-वन्यजीव संघर्ष की जानकारी दी। इसके बाद हिंसक वन्यजीव के निस्तारण, पिंजरा लगाने और अभियान चलाने की अनुमति मिल गई।

डीएफओ ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि सबसे पहले बाघ को ट्रैंकुलाइज कर सुरक्षित कैद करने का प्रयास किया जाएगा। उनके आश्वासन के बाद रात करीब पौने आठ बजे ग्रामीण शव उठाने पर राजी हुए, लेकिन मृतका के घर पर देर रात साढ़े 11 बजे तक अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच वार्ता जारी रही। वन विभाग ने बताया कि हमलावर वास्तव में बाघ था या गुलदार, इसकी वैज्ञानिक पुष्टि के लिए शव पर मिले लार और बालों के नमूने एकत्र कर देहरादून स्थित प्रयोगशाला भेजे जा रहे हैं। फिलहाल पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है और ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि स्थायी समाधान नहीं हुआ तो वे फिर आंदोलन करेंगे।

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