श्रीदेवताल-माणा पास सीमा दर्शन लोकयात्रा की शुरुआत, आस्था और सैन्य शौर्य का अनूठा संगम

Badrinath, 17 September, 2026। उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित भारत-तिब्बत (चीन) सीमा पर प्रतिवर्ष आयोजित होने वाली ऐतिहासिक ‘श्रीदेवताल–माणा पास सीमा दर्शन लोकयात्रा’ का शुभारंभ गुरुवार को कन्या संक्रांति के पावन अवसर पर हो रहा है। श्रीबदरीनाथ धाम से लगभग 55 किलोमीटर दूर और समुद्र तल से करीब 18,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस दुर्गम क्षेत्र की यात्रा के लिए सभी 18 तीर्थयात्री बदरीनाथ पहुंच चुके हैं, जिन्हें चमोली जिला प्रशासन द्वारा इनर लाइन परमिट जारी किए गए हैं।
वर्ष 2015 में पूर्व कैबिनेट मंत्री स्व. मोहन सिंह ‘गांववासी’ द्वारा पुनर्जीवित की गई यह लोक यात्रा धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सीमावर्ती रक्षा बलों के प्रति सम्मान को एक साथ पिरोने का काम करती है। उनकी इस लोक विरासतीय यात्रा का नेतृत्व उत्तराखंड वरिष्ठ नागरिक कल्याण परिषद के अध्यक्ष व दर्जाधारी रामचंद्र गौड़ करेंगे। चमोली जनपद के उच्च हिमालय क्षेत्र में स्थित देवताल सरोवर को धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
यह पवित्र सरोवर माणा दर्रे और भारत-चीन सीमा क्षेत्र के निकट है। धार्मिक मान्यता है कि देवताल में देवता स्नान करते हैं। यहीं से सरस्वती नदी का उद्गम भी है। यात्रा के संयोजक प्रोफे. (डॉ.) सुभाष चंद्र थलेडी ने बताया कि चमोली जिला प्रशासन ने इस बार 18 तीर्थयात्रियों के लिए इनर लाइन परमिट जारी किए गए हैं। उन्होंने बताया कि यात्रा का उद्देश्य उच्च हिमालय क्षेत्र की लोक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सीमांत क्षेत्र से जुड़े धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व को जनमानस तक पहुंचाना भी है।
माणा दर्रा दुनिया की सबसे ऊंची वाहन योग्य सड़कों में से एक है। इस यात्रा के माध्यम से श्रद्धालुओं और नागरिकों को देश की दुर्गम सीमाओं, सेना, आईटीबीपी और अर्धसैनिक बलों के जवानों के त्याग और सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास को प्रत्यक्ष देखने का भी अवसर मिलता है। लोकयात्रा में शामिल होने वाले सहयात्रियों नीरज नैथानी, राजेश नंबूरी, राजेश जैन, राजेंद्र कपरुवान, माधुरी नैथानी, नरेश नौटियाल, देवेंद्र उनियाल, रक्षा उनियाल, रेणु नौटियाल आदि में इसे लेकर खासा उत्साह है।
डा. थलेडी ने बताया कि वर्ष 1962 के बाद यह सीमावर्ती क्षेत्र आम लोगों की आवाजाही के लिए बंद रहा था। पूर्व कैबिनेट मंत्री ‘गांववासी’ के सतत प्रयासों के बाद वर्ष 2015 में जिला प्रशासन एवं सेना की अनुमति से सीमित संख्या में यात्रियों के साथ इस यात्रा का पुनः शुभारंभ हुआ। इसके बाद से यह यात्रा प्रतिवर्ष आयोजित की जा रही है।



