देश के बांधों को सुरक्षित बनाएंगे आईआईटी रुड़की के ‘सुपर इंजीनियर’

- हाई-टेक ट्रेनिंग: भूकंपीय जोखिम, गाद प्रबंधन, मॉनिटरिंग और आपातकालीन कार्य योजना (EAP) पर रहेगा विशेष ध्यान।
- संस्थानों का विस्तार: NIT सूरत, कालीकट, नागपुर, गुवाहाटी और शिलांग को भी क्षमता निर्माण अभियान से जोड़ने की तैयारी।
- दिसंबर 2026 की डेडलाइन: राज्यों को समय सीमा के भीतर बांधों का जोखिम मूल्यांकन और सुरक्षा रिपोर्ट पूरी करने के निर्देश।
देहरादून। देश में पुराने होते बांधों, जलवायु परिवर्तन, अत्यधिक वर्षा और भूकंपीय जोखिमों से निपटने के लिए भारत सरकार ने बांध सुरक्षा व्यवस्था को और पुख्ता करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत आईआईटी रुड़की और आईआईएससी बेंगलुरु जैसे शीर्ष संस्थान अब देश के बांधों की निगरानी और सुरक्षा के लिए विशेषज्ञ इंजीनियर तैयार करेंगे।
जल शक्ति मंत्रालय की पहल पर विभिन्न राज्यों के इंजीनियरों को इन संस्थानों के विशेष पोस्ट-ग्रेजुएट (PG) कार्यक्रमों में नामांकित किया जाएगा, ताकि वे आधुनिक तकनीक और जोखिम प्रबंधन से बांधों को नई मजबूती दे सकें। आईआईटी रुड़की का यह प्रशिक्षण कार्यक्रम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके अलावा महत्वपूर्ण बांधों की निगरानी और सुरक्षा के लिए नए तकनीकी दिशा-निर्देश तैयार किए जाएंगे।
बांधों के डिजाइन, निर्माण, गुणवत्ता नियंत्रण और निरीक्षण से जुड़ी एजेंसियों के लिए मान्यता प्रणाली को मजबूत बनाने, बांध विफलता की वैज्ञानिक रिपोर्टिंग का ढांचा तैयार करने, विशेषज्ञों का पैनल बनाने तथा जोखिम आधारित सुरक्षा प्रणाली विकसित करने पर भी सहमति बनी है। जलाशयों में बढ़ती गाद की समस्या से निपटने के लिए नए प्रावधानों पर भी विचार किया जा रहा है। केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष अनुपम प्रसाद के अनुसार आईआईटी रुड़की के नेतृत्व में तैयार होने वाले प्रशिक्षित इंजीनियर देश की बांध सुरक्षा व्यवस्था को अधिक वैज्ञानिक, तकनीक आधारित और विश्वस्तरीय बनाएंगे। इसका लाभ उत्तराखंड सहित उन सभी राज्यों को मिलेगा जहां बड़े बांध जल, सिंचाई और बिजली उत्पादन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं। साथ ही राज्यों को दिसंबर 2026 तक व्यापक सुरक्षा मूल्यांकन, जोखिम अध्ययन और आपातकालीन कार्य योजनाएं पूरी करने की दिशा में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।
इस पहल के तहत विभिन्न राज्यों के सिंचाई, जल संसाधन और बांध परियोजनाओं से जुड़े इंजीनियर उच्च स्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। प्रशिक्षण के दौरान बांधों की संरचनात्मक सुरक्षा, भूकंपीय जोखिम, आधुनिक मॉनिटरिंग सिस्टम, जलाशय प्रबंधन, आपातकालीन कार्य योजना (ईएपी), जोखिम मूल्यांकन और संचालन एवं रखरखाव (ओएंडएम) जैसे विषयों पर विशेष फोकस रहेगा। इससे इंजीनियर वास्तविक परिस्थितियों में बेहतर निर्णय लेने में सक्षम बनेंगे।
क्षमता निर्माण का दायरा और बढ़ाने के लिए एनआईटी सूरत, कालीकट, नागपुर, गुवाहाटी और शिलांग जैसे प्रमुख तकनीकी संस्थानों को भी प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जोड़ने की संभावनाएं तलाशने का निर्णय लिया गया है। साथ ही बांध मालिकों को तकनीकी एवं शैक्षणिक संस्थानों के साथ स्वतंत्र सहयोग विकसित करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि जरूरत के अनुसार विशेष प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता मिलती रहे।



