धनराशि स्वीकृत, पर जमीन नहीं! उत्तराखंड में 1500 से अधिक आंगनबाड़ी भवनों का काम ठप

Dehradun, 23 September, 2026। प्रदेश में बच्चों और महिलाओं को मिलने वाली पोषण व स्वास्थ्य सुविधाओं की नींव यानी ‘आंगनबाड़ी केंद्र’ जमीन की कमी के कारण संकट में हैं। विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में प्रस्तावित 4618 आंगनबाड़ी भवनों में से 1503 के लिए अब तक भूमि उपलब्ध नहीं हो सकी है, जबकि 3940 भवनों के लिए धनराशि भी स्वीकृत हो चुकी है। जमीन न मिलने के कारण सैकड़ों केंद्र वर्तमान में किराये के भवनों या अस्थाई जगहों पर चलने को मजबूर हैं, जिससे लाभार्थियों को दी जाने वाली सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं। सबसे खराब स्थिति हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और पौड़ी जिलों की है। इसके अलावा अल्मोड़ा में 132, चमोली में 122, देहरादून में 122 और बागेश्वर में 45 भवनों के लिए भूमि नहीं मिल पाई है।
रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में कुल 4618 आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण प्रस्तावित है, जिनमें 3940 भवनों के लिए धनराशि स्वीकृत की जा चुकी है। अधिकारियों के अनुसार भवन निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध नहीं होने से कई केंद्र किराये के भवनों अथवा अन्य स्थानों पर संचालित किए जा रहे हैं। इससे बच्चों और लाभार्थियों को मिलने वाली सुविधाएं प्रभावित होने की स्थिति बनी हुई है। आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों की शिक्षा एवं स्वास्थ्य, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के पोषण संबंधी सेवाएं संचालित होती हैं।
विभाग ने जिलों से समन्वय कर सरकारी भूमि की उपलब्धता तलाशने और भवन निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर जोर दिया है।



