
Uttarkashi, 12 October, 2026। आपदा की विभीषिका में दबी धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करने के लिए धराली के ग्रामीणों ने आत्मनिर्भरता की एक अनूठी मिसाल पेश की है। पिछले वर्ष खीर गंगा में आई विनाशकारी बाढ़ के मलबे में समाए ऐतिहासिक एवं प्राचीन कल्पकेदार मंदिर को बाहर निकालने के लिए शारदीय नवरात्र के पहले दिन से खुदाई का कार्य शुरू कर दिया गया है। सरकारी स्तर पर कार्रवाई में देरी होने के बाद, ग्रामीणों ने आराध्य सोमेश्वर देवता की आज्ञा लेकर स्वयं के संसाधनों से मंदिर के अस्तित्व और क्षेत्र की धार्मिक पहचान को बचाने का संकल्प लिया है। पिछले वर्ष पांच अगस्त को खीर गंगा में आई बाढ़ ने धराली में भारी तबाही मचाई थी। बाढ़ के साथ आए मलबे में प्राचीन कल्पकेदार मंदिर का गर्भगृह और परिसर दब गया, जबकि मंदिर का ऊपरी गुंबद भी ध्वस्त हो गया था। मंदिर धराली की धार्मिक पहचान के साथ स्थानीय लोगों की आजीविका का भी महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते थे।
प्राचीन कल्पकेदार मंदिर समिति के अध्यक्ष राजेश पंवार और सचिव संजय पंवार के अनुसार, प्रदेश सरकार ने मंदिर को मलबे से बाहर निकालने का आश्वासन दिया था, लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद ग्रामीणों ने स्वयं खुदाई कराने का निर्णय लिया। आपदा की बरसी पर पांच अगस्त को ग्रामीणों ने आराध्य सोमेश्वर देवता से खुदाई शुरू करने की अनुमति मांगी थी। ग्रामीणों के अनुसार, देवता ने नवरात्र से कार्य शुरू करने की अनुमति दी थी।
मंदिर की खुदाई के लिए एक्सकेवेटर मशीन प्रतिदिन करीब आठ घंटे संचालित की जाएगी। इस पर लगभग 40 हजार रुपये रोजाना खर्च होने का अनुमान है। ग्रामीणों की पहल से मंदिर के अस्तित्व को बचाने और धराली की धार्मिक विरासत को फिर से स्थापित करने की उम्मीद जगी है। खुदाई कार्य शुरू होने के दौरान मंदिर समिति के पदाधिकारी, ग्राम प्रधान, ग्रामीण, महिला मंगल दल और कीर्तन मंडली के सदस्य मौजूद रहे।



