उत्तराखंड

कैग रिपोर्ट: देहरादून में प्रदूषण सेंसरों पर लुटाए करोड़ों

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी को ‘स्मार्ट’ बनाने के दावों के बीच एक बड़ा वित्तीय और प्रशासनिक घालमेल सामने आया है। देहरादून स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत शहर की आबोहवा पर नजर रखने के लिए करोड़ों रुपये की लागत से लगाए गए पर्यावरण सेंसर पूरी तरह सफेद हाथी साबित हुए हैं। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट ने इस पूरी कवायद की पोल खोलते हुए बताया है कि लगभग 2.62 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित किए गए 50 सेंसर न तो तकनीकी मानकों पर खरे उतरे और न ही प्रदूषण मापने के अपने मूल उद्देश्य को पूरा कर सके।
चौंकाने वाली बात यह है कि इन उपकरणों की खरीद से पहले न तो उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से कोई तकनीकी सुझाव लिया गया और न ही केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के कड़े मानकों का ध्यान रखा गया। रिपोर्ट में इस बात पर भी गहरा क्षोभ जताया गया है कि शहर के व्यस्त चौराहों पर लगे डिस्प्ले बोर्ड्स पर जो एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) जनता को दिखाया जा रहा था, उसका इन सेंसरों के डेटा से कोई लेना-देना ही नहीं था। एक तरफ जहां ये सेंसर धूल फांक रहे थे, वहीं दूसरी ओर इनके रखरखाव के नाम पर दिसंबर 2023 तक करीब 24.76 लाख रुपये अतिरिक्त खर्च कर दिए गए। यह मामला न केवल सरकारी धन की बर्बादी को दर्शाता है, बल्कि स्मार्ट सिटी के नाम पर बिना दूरदर्शिता के किए गए कार्यों पर भी गंभीर सवालिया निशान खड़े करता है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि इन सेंसरों के सीमित उपयोग के बावजूद उनके संचालन और रखरखाव पर खर्च जारी रहा। दिसंबर 2023 तक इस मद में 24.76 लाख रुपये खर्च किए जा चुके थे।
शासन ने कैग की आपत्तियों को स्वीकार करते हुए कहा है कि देहरादून स्मार्ट सिटी लिमिटेड अब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से समन्वय कर इन सेंसरों का अन्य स्थानों पर उपयोग करने की कोशिश करेगा। हालांकि कैग ने इस तर्क को संतोषजनक नहीं माना और स्पष्ट किया कि केवल स्थान बदलने से समस्या का समाधान नहीं होगा।
यह रिपोर्ट स्मार्ट सिटी परियोजना के क्रियान्वयन और योजना निर्माण पर गंभीर सवाल खड़े करती है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि पर्यावरण निगरानी प्रणाली ही प्रभावी न हो, तो यह प्रशासनिक समन्वय और निर्णय प्रक्रिया की खामियों को उजागर करता है।
बाक्स: शहर में पहले से मौजूद थे मॉनिटरिंग स्टेशन
कैग जांच में यह भी सामने आया कि उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के तहत देहरादून में पहले से तीन एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन (AQMS) और एक कंटीन्यूअस एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन संचालित थे। इसके बावजूद देहरादून स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने दिसंबर 2018 में स्वीकृत डीपीआर के आधार पर जनवरी 2020 में 2.37 करोड़ रुपये की लागत से 50 नए सेंसर खरीदकर नवंबर 2020 में शहर में स्थापित कर दिए।

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