उत्तराखंड

चंपावत में गुलदार का खूनी हमला, सीता की जांबाजी से बची गीता की जान

चंपावत। उत्तराखंड के पहाड़ों में गुलदार का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है, लेकिन लोहाघाट के धौनी सिलिंग गांव में दो महिलाओं ने अदम्य साहस का परिचय देकर ‘यमराज’ को भी पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। रविवार को जंगल में चारा लेने गई गीता देवी पर घात लगाकर बैठे गुलदार ने जानलेवा हमला बोल दिया, जिससे वह बुरी तरह लहूलुहान हो गईं। अपनी सहेली को मौत के करीब देख सीता देवी घबराई नहीं, बल्कि पत्थर उठाकर खूंखार गुलदार से भिड़ गईं। उनके इस साहसिक प्रतिरोध और शोर के आगे गुलदार को हार माननी पड़ी और वह शिकार छोड़कर जंगल की ओर भाग खड़ा हुआ।

रविवार को सीता अपनी सहेली गीता देवी के साथ रोज की तरह जंगल में चारा लेने निकली थीं। घर से करीब 200 मीटर दूर पहुंचते ही झाड़ियों में छिपे गुलदार ने अचानक गीता पर हमला बोल दिया। कुछ समझ पाते उससे पहले ही उसने अपने तेज पंजों से गीता के चेहरे और कंधे को घायल कर दिया।

इस दौरान सीता ने घबराने के बजाय साहस दिखाया। उसने तुरंत शोर मचाना शुरू किया और आसपास पड़े पत्थरों को उठाकर गुलदार पर लगातार फेंकने लगी। सीता के इस साहसिक प्रतिरोध से गुलदार घबरा गया। पत्थरों की चोट और बढ़ते शोर के बीच आखिरकार वह गीता को छोड़ जंगल की ओर भाग गया।

हमले में गीता देवी गंभीर रूप से घायल हो गईं। उनके चेहरे और कंधे पर गहरे जख्म आए हैं। घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे और उन्हें तुरंत उपजिला अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें चंपावत जिला अस्पताल रेफर कर दिया, जहां अब उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।

घटना के बाद गांव और आसपास के क्षेत्रों में डर का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि यह गुलदार पहले भी इलाके में दो लोगों को अपना शिकार बना चुका है, जिससे लोगों में दहशत और बढ़ गई है। उन्होंने वन विभाग से जल्द कार्रवाई करते हुए पिंजरा लगाकर गुलदार को पकड़ने की मांग की है।

वन विभाग भी हरकत में आ गया है। रेंजर नारायण पांडेय के अनुसार, टीम मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा ले रही है और लोगों को सतर्क रहने के लिए जागरूक किया जा रहा है। साथ ही, गुलदार की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

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