आधी रात फिर कांपी उत्तरकाशी की धरती, 4.2 की तीव्रता के भूकंप की दहशत में आधी रात को घरों से भागे लोग


Uttarkashi, 10 August, 2026। देवभूमि उत्तराखंड में एक बार फिर आधी रात सन्नाटा चीरती हुई धरती के कंपन ने हजारों लोगों की नींद उड़ा दी। उत्तरकाशी जिले में तड़के करीब 1 बजकर 21 मिनट पर भूकंप का तेज झटका महसूस किया गया, जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.2 मापी गई। जमीन के भीतर 10 किलोमीटर की गहराई पर हुए इस भूगर्भीय हलचल के कुछ ही देर बाद 2.2 तीव्रता का आफ्टरशॉक दर्ज किया गया, जिससे खौफजदा होकर लोग रात में ही अपने घरों से बाहर निकल आए। बीते 10 दिनों के भीतर प्रदेश में आया यह छठा भूकंप है, जिसने 1991 के विनाशकारी उत्तरकाशी भूकंप का खौफनाक मंजर एक बार फिर लोगों की यादों में ताजा कर दिया है। इससे लोगों में दहशत फैल गई। भूकंप के लिहाज से उत्तराखंड संवेदनशील राज्य है। अधिकतर भूभाग भूकंप के अति संवेदनशील जोन में आता है।
हिमालयी क्षेत्र में भारतीय और यूरेशियन टेक्टॉनिक प्लेटों के बीच दबाव और घर्षण से धरती के भीतर ऊर्जा जमा होती रहती है। छोटे झटके सक्रिय भूगर्भीय क्षेत्र की हलचल का संकेत हो सकते हैं। हालांकि हर छोटे भूकंप को बड़े भूकंप का सीधा संकेत नहीं माना जा सकता। भूकंप वैज्ञानिक डॉ. नरेश कुमार के अनुसार हिमालय क्षेत्र में भूकंप की संभावना अधिक है, लेकिन यह बताना बेहद मुश्किल है कि भूकंप कब और कहां आएगा। वैज्ञानिकों के सामने तीन अहम सवाल होते हैं—भूकंप कहां आएगा, कब आएगा और कितना बड़ा होगा। स्थान का अनुमान कुछ हद तक लगाया जा सकता है, लेकिन समय और तीव्रता की सटीक भविष्यवाणी फिलहाल संभव नहीं है।
भूकंपीय गतिविधियों पर नजर रखने के लिए उत्तराखंड में दो जीपीएस लगाए गए हैं। इनके माध्यम से पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि किस क्षेत्र में सबसे अधिक ऊर्जा एकत्र हो रही है। सटीक जानकारी के लिए निगरानी तंत्र बढ़ाने की जरूरत है।
उत्तराखंड पहले भी बड़े भूकंपों का दर्द झेल चुका है। अक्टूबर 1991 में उत्तरकाशी में आए भूकंप में 700 से अधिक लोगों की जान गई थी। मार्च 1999 में चमोली में आए भूकंप में करीब 100 लोगों की मौत हुई और हजारों लोग बेघर हुए। ऐसे में आधी रात को 4.2 तीव्रता के झटके ने उत्तरकाशी के लोगों को एक बार फिर पुराने खौफ की याद दिला दी। खास बात यह है कि बीते दस दिनों में उत्तराखंड में भूकंप के छह झटके दर्ज किए जा चुके हैं। 10 अगस्त को ही तीन भूकंपीय घटनाएं दर्ज हुईं। इनमें सबसे तेज झटका उत्तरकाशी में 4.2 तीव्रता का रहा। इसके बाद उत्तरकाशी में 2.2 और टिहरी गढ़वाल में 2.0 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। इससे पहले तीन अगस्त को चमोली में 3.4, एक अगस्त को बागेश्वर में 2.9 और 31 जुलाई को उत्तरकाशी में 3.1 तीव्रता का झटका आया था।



